Indian Constitution Amended? | Special vs. Simple Majority DishaManch Academy by Ankit dev Rajput
Автор: DishaManch Academy . Reserch&Analysis
Загружено: 2026-03-04
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नमस्ते! आगरा स्थित दिशा मंच एकेडमी (DishaManch Academy) और अंकित देव राजपूत जी के मार्गदर्शन में तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भारतीय संविधान संशोधन की प्रक्रिया को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 (भाग XX) में संशोधन की प्रक्रिया का वर्णन है। भारतीय संविधान न तो बहुत लचीला है और न ही बहुत कठोर; यह दोनों का एक अनूठा मिश्रण है।
संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368)
संविधान में मुख्य रूप से तीन प्रकार से संशोधन किए जा सकते हैं:
1. संसद के साधारण बहुमत द्वारा
कुछ प्रावधानों को साधारण बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले 50% से अधिक सदस्य) द्वारा बदला जा सकता है। तकनीकी रूप से इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत 'संशोधन' नहीं माना जाता।
उदाहरण: नए राज्यों का गठन, राज्यों के नाम या सीमा में परिवर्तन, नागरिकता से संबंधित नियम।
2. संसद के विशेष बहुमत द्वारा
अधिकांश संशोधनों के लिए अनुच्छेद 368 के तहत 'विशेष बहुमत' की आवश्यकता होती है:
सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (50% से अधिक)।
सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत।
उदाहरण: मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) और राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP)।
3. विशेष बहुमत + आधे राज्यों का अनुमोदन
जब संशोधन से संघीय ढांचे (केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का बँवारा) पर प्रभाव पड़ता है, तब यह प्रक्रिया अपनाई जाती है:
संसद का विशेष बहुमत (2/3)।
साथ ही, कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का साधारण बहुमत से समर्थन।
उदाहरण: राष्ट्रपति का चुनाव, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की शक्तियां, GST परिषद।
महत्वपूर्ण नियम जो आपको याद रखने चाहिए:
शुरुआत: संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है। इसे राज्य विधानसभाओं में पेश नहीं किया जा सकता।
संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं: यदि दोनों सदनों के बीच असहमति हो, तो साधारण विधेयकों की तरह यहाँ 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। दोनों सदनों से इसे अलग-अलग पारित होना अनिवार्य है।
राष्ट्रपति की सहमति: 24वें संविधान संशोधन (1971) के बाद, राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी सहमति देने के लिए बाध्य हैं। वे इसे न तो वापस भेज सकते हैं और न ही रोक सकते हैं।
मूल संरचना (Basic Structure): 1973 के केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से को बदल सकती है, लेकिन वह इसके 'मूल ढांचे' (जैसे धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, न्यायिक समीक्षा) को नष्ट नहीं कर सकती।
दिशा मंच एकेडमी (Agra) के लिए सुझाव
अंकित देव राजपूत जी, यदि आप अपनी क्लासेज या नोट्स के लिए महत्वपूर्ण संशोधनों (जैसे 42वां "लघु संविधान", 44वां, 73वां या 101वां GST) की एक सूची चाहते हैं, तो क्या मैं वह आपके लिए तैयार कर दूँ?
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