Saint Dr. MSG की Parole and Furlough पर बड़ी अपडेट ! Law | Court | Dera Sacha Sauda | Ram Rahim
Автор: SACH KAHOON
Загружено: 2024-03-02
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Saint Dr. MSG की Parole and Furlough पर बड़ी अपडेट ! Law | Court | Dera Sacha Sauda | Ram Rahim
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पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का फरलो या पैरोल पर अक्सर बाहर आना मीडिया व राजनीति गलियारों में चर्चा विषय बना रहता है। कुछ लोग कहते हैं कि पूज्य गुरु जी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है जिस वजह से उन्हें पार्टी विशेष की तरफ से जेल मैन्युअल (नियमों) ढील देते हुए बार-बार फरलो या पैरोल दी जाती है। आओ जाने क्या वाक्य ही ऐसा है, तथ्यों सहित इस बात पर विश्लेषण करें….
इस मामले में जब इस संवाददाता ने तथ्यों को खंगाला तो उन्होंने हाल में एक इंग्लिश वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में पाया कि पूज्य गुरु जी अकेले नहीं हैं जिन्हें फरलो या पैरोल मिली बल्कि अगर अकेले वर्ष 2023 की बात करें तो इस वर्ष के दौरान, हरियाणा में हर दूसरा कैदी / बंदी पैरोल या फरलो (अस्थायी रिहाई) पर बाहर आया। उस रिपोर्ट में पाया कि अकेले वर्ष 2023 के दौरान हरियाणा में कुल 5,832 बंदियों में से 48% यानि लगभग 2801 बंदियों को पैरोल या फरलो मिली जो कि एक बहुत बड़ी संख्या है। Ram Rahim इन 48% (2801) बंदियों में काफी ऐसे भी बंदी शामिल थे जिन्होंने 2023 की एक साल (1 जनवरी, 2023 से 31 दिसंबर, 2023) की अवधि के दौरान इन दोनों सुविधाओं (पैरोल तथा फरलो) का लाभ कई बार उठाया।
हालाकि उपरोक्त आंकड़ों में 183 बंदियों को शामिल नहीं किया गया, जिन्होंने इसी अवधि के दौरान ‘आपातकालीन पैरोल’ और ‘हिरासत पैरोल’ सहित अस्थायी रिहाई का लाभ उठाया था। शेष 52% के बारे में रिपोर्ट के आंकड़े यह बताते है कि शेष 52% यानि 3032 बंदी या तो अस्थायी रिहाई के लिए पात्र नहीं थे या बाहर नहीं जाना चाहते थे क्योंकि पैरोल की अवधि कैद की अवधि में से नहीं घटाई जाती है। यानि इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि जेल मैन्युअल के अनुसार योग्य होने पर फरलो पर बाहर आना या न आना बंदी की इच्छा पर निर्भर करता है न कि राजनीतिक विशेष छूट पर। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टि से हम कह सकते हैं कि पूज्य गुरु जी को विशेष छूट नहीं है तथा पूज्य गुरु जी को भी अन्य लोगों की तरह ही फरलो की सुविधा दी गई। हरियाणा अच्छे आचरण कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 2022 (Hr Good Conduct Prisoners Act, 2022) के अनुसार, एक बंदी एक वर्ष की अवधि के दौरान 70 दिनों की पैरोल और 21 दिनों की छुट्टी (फरलो) ले सकता है।
इस इंग्लिश वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस महानिदेशक (जेल) मोहम्मद अकिल ने बताया कि किसी भी बंदी को कोई तरजीह नहीं दी जा रही है। ‘सब कुछ नियमों के अनुसार और अधिनियम के प्रावधानों के तहत किया जा रहा है। डिविजन कमिश्नर या डिप्टी कमिश्नर प्रत्येक मामले की योग्यता (स्थिति) और मामलों की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेते हैं। आम तौर पर, सभी बंदी राज्य सरकार द्वारा बनाए गए पैरोल और फरलो ले सकते हैं। इस इंग्लिश वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूज्य गुरु जी को विशेष सुविधा नहीं दी जा रही बल्कि वास्तव में, 99% बंदी ऐसे हैं जो अस्थायी रिहाई (पैरोल या फरलो) का लाभ लेते हैं।”
उपरोक्त सभी तथ्यों तथा पक्षों को ध्यान रख यह कह सकते है कि पूज्य गुरू जी को समय-समय पर मिलने वाली पैरोल या फरलो की सुविधा सभी कानूनों व नियमों का पालन करते हुए अन्य लोगों की तरह ही दी गई तथा इसमें किसी प्रकार की विशेष छूट या राजनीतिक संरक्षण नहीं मिला। Ram Rahim
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