Aigiri Nandini | Astha Mishra | Fast Version Of Aigiri Nandini |Manpreet Kaur
Автор: Osm Bhakti
Загружено: 2025-09-19
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Описание:
🌺 Aigiri Nandini | Mahishasura Mardini Stotra | Powerful Durga Chant 🌺
Immerse yourself in the divine vibrations of “Aigiri Nandini,” a powerful hymn dedicated to Goddess Durga, the fierce form of feminine Shakti. This stotra praises Devi as the slayer of Mahishasura and invokes her strength, courage, and grace.
Singer : Astha Mishra
Music : Kevin Brown
Lyrics:
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते ।
गिरिवरविन्ध्य-शिरोऽधि निवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ॥
भगवति हे शितिकण्ठ-कुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 1 ।।
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमारिषु हर्षरते ।
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ॥
दनुजनिरोषिणि दुर्मदशोषिणि दुर्मुखमर्षिणि सिंधुसुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 2 ।।
अयि जगदम्ब मदम्बकदम्बवनप्रियवासिनि हासरते ।
शिखरिशिरोमणि तुङ्गहिमालय श्रीनिजालय मध्यगते ॥
मधुमधुरे मधुकैटभघातिनि महिषवधारिणि रासरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 3 ।।
अयि निजहुम्कृति-मानिनिराकृत-धूम्रविलोचन-धूम्रशते ।
समरविशोषित-शोणितबीजसमुद्भव-शोणितबीजलते ॥
शिवशिवे शुभशुभे महाहव तर्पित-भूत-पिशाचारते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 4 ।।
अयि शतखण्ड-विखण्डित-रूण्ड-वितुण्डित-शुण्ड-गजाधिपते ।
निजभुजदण्ड-निपातितखण्ड-विपातितमुण्ड-भटाधिपते ॥
ऋतुगणसङ्ग्रथितारुण-चण्ड-परिष्कृत-खण्ड-पराशुपते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 5 ।।
धुरितदुरूह-रणक्षणसङ्गर-वर्षणशोणितबिन्दुरते ।
कनकपिशङ्ग-पृषत्कनिषङ्ग-रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ॥
शितिकरशक्तिरुचितविक्षत-शक्तिकृतोक्तित-रक्तबटे ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 6 ।।
अयि रणदुर्मद-शत्रुवधोदित-दुर्धर-निर्भर-शक्तिभृते ।
चतुर-विशार-धुरीण-महाशयदूतकृत-प्रमथाधिपते ॥
दुरित-दुरीह-दुराशय-दुर्मति-दानव-दूतकृतान्तगते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 7 ।।
अयि शरणागत-वैरिवधूनवर-वीरवराभय-दायकरे ।
त्रिभुवनमस्तक-शुल्विरिषणि-शिरिषणिकेतन-शूलकरे ॥
दुमिदुमितामर-दुन्दुभिनाद-महामुखरीकृत-दीग्करे ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 8 ।।
सुरललना-ततथेयित-धृत-तापनीय-मदप्रसरोत्कर ।
विगतकुकुथ-कुकुथोदित-उत्ताल-कूतुक-गानरते ॥
धुधुकुट-धुक्कुट-धिमिधि-धिन्धिम-धीर-मृदंग-निनादरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 9 ।।
जय जय जप्यजये जयशब्द-परस्तुतितत्त्व-निगम्यते ।
झणझण-झिञ्झिम-झिङ्कृत-नूपुर-शिञ्जित-मोहित-भूतपते ॥
नटितनटार्ध-नटीनटनायक-नटन-नाटित-नाटयरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 10 ।।
अयि सुमनः-सुमनः-सुमनः-सुमनः-सुमनोहरकान्तियुते ।
श्रितरजनी-रजनी-रजनी-रजनी-रजनीकरवक्त्रवृते ॥
सुनयन-विभ्रम-भ्रमर-भ्रमर-भ्रमर-भ्रमराभिवृते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 11 ।।
महित-महाहव-मल्लमतल्लिक-मल्लित-रल्लक-वल्लरते ।
विरचयलाल-कपलिक-पल्लव-पल्लव-कल्लोल-कल्ललते ॥
शितकृतफुल्ल-समुज्ज्वलसत्सर-णल्ललितामल-पल्लव-सल्ललिते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 12 ।।
अयि सुधतीजन-लालस-मानस-मोहन-मन्मथराजसुते ।
अविरलगण्ड-गलन्मदमेदुर-मत्तमतङ्गजराजसुते ॥
त्रिभुवनभूषण-भूतकलानिधि-रूपपयोनिधिराजसुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 13 ।।
अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे ।
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुभवत्युमे ॥
अयि सुरवर्य-निराकृत-देवता-भावनाभवतामकले ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥। 14 ।।
📿 Reciting or listening to this stotra is believed to bring:
Protection from negative energies
Inner strength and confidence
Peace, clarity, and spiritual growth
🕉️ Lyrics Origin: Mahishasura Mardini Stotra by Adi Shankaracharya
🕔 Best Time to Listen: Early mornings, Navratri, or during meditation
🙏 Let the divine energy of Devi fill your heart and home.
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