जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए? | एक दिल को छू लेने वाली रचना | new song 2026 | Commando Kavy Darpan
Автор: Commando Kavy Darpan
Загружено: 2026-01-02
Просмотров: 1704
Описание:
"जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए..." यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि गाँव के संघर्ष, बदलते रिश्तों और खोती हुई परम्पराओं का एक दर्दनाक सच है। समोद कमांडो की कलम और विनोद चौधरी के संगीत ने इस रचना में जान फूंक दी है।
Video Credits:
🎤 Writer & Performer: Samod Commando (समोद कमांडो)
🎹 Music Composition: Vinod Chaudhary (विनोद चौधरी)
🎬 Channel: Commando Kavy Darpan
📍 Special Mention: Gaon 'Charaura' (गाँव चरौरा)
Lyrics Highlights:
जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए
जाकिट, स्वेटर, शाल, रजाई, कहाँ गए
जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए...
रात अचानक आँधी आयी तो जाना
गेंहूँ, भूसा, और पताई कहाँ गए
रात अचानक आँधी आयी तो जाना...
छुट्टी आकर भैय्या जी, माँ से बोले
हांडी वाले दूध मलाई, कहाँ गए
जाकिट, स्वेटर, शाल, रजाई, कहाँ गए
जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए...
ढोर बिकाऊ हैं अब भी घर में, लेकिन?
वो मुल्ला रहमान कसाई कहाँ गए
गिद्धों का गायब होना तो जायज़ था
काका - काकी, ताऊ -ताई कहाँ गए
जाकिट, स्वेटर, शाल, रजाई, कहाँ गए
जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए...
जिसको देखो, सबकी आंखें सूजी हैं
हँसने वाले लोग - लुगाई कहाँ गए
जिसको देखो, सबकी आंखें सूजी हैं...
भाई चलकर देखो गाँव 'चरौरा' में
मेरे वो दुश्मन हरजाई कहाँ गए
मेरे वो दुश्मन हरजाई कहाँ गए...
जोड़े थे जो पाई - पाई, कहाँ गए...
कहाँ गए...
कहाँ गए...
About This Video:
इस वीडियो में एक आम आदमी की उस पीड़ा को दिखाया गया है जब वह अपनी जीवन भर की कमाई और अपने लोगों को खोता हुआ देखता है। गाँव 'चरौरा' के सन्दर्भ में लिखी गई यह कविता हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी जो अपनी मिट्टी से जुड़ा है।
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