मणिमहेश यात्रा से पहले ब्राह्मणी माता मंदिर क्यों जाते हैं? Bharmani MaTa Temple | Bharmour |
Автор: Rinku Gagat
Загружено: 2023-09-25
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मणिमहेश यात्रा से पहले ब्राह्मणी माता मंदिर क्यों जाते हैं?
कहा जाता है कि माता ब्रह्माणी कभी चौरासी मंदिर भरमौर के प्रांगण में विराजमान हुआ करती थीं। माता ब्राह्मणी यहां स्थित एक विशालकाय देवदार वृक्ष के समीप तपस्या किया करती थीं। वह ब्रह्मा की बेटी हैं। एक दिन स्वयं भगवान भोलेनाथ अपने 84 सिद्धों के साथ आए और इस स्थान पर एक रात बिताने के लिए यहां रुक गए। माता ब्रह्माणी जब भ्रमण के बाद यहां लौटीं तो यहां विराजमान 84 सिद्धों को देखकर क्रोधित हो उठीं।
माता के पूछने पर भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रकट हुए और कहा कि माता आप निराश न हों। मेरे ये 84 सिद्ध केवल एक रात यहां ठहरेंगे लेकिन सुबह होने पर माता ने देखा कि उनके परिसर में 84 सिद्धों के स्थान पर 84 शिवलिंग स्थापित हो गए हैं। माता के क्रोधित होने पर भोलेनाथ पुन: प्रकट हुए और माता ब्रह्माणी से कहा कि अब यह स्थान चौरासी धाम के नाम से प्रख्यात होगा और आप किसी दूसरी जगह पर चली जाएं।
उन्होंने माता ब्रह्माणी को वरदान दिया कि आज के बाद जो भी भक्त मेरे दर्शन के लिए चौरासी धाम या मणिमहेश यात्रा के लिए आएगा वह सबसे पहले माता ब्रह्माणी के दर्शन करेगा तभी उसकी यात्रा सम्पूर्ण मानी जाएगी। भोलेनाथ के इस वचन के साथ माता ब्रह्माणी डूग्गा सार नामक स्थान पर चली गईं।
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