Hum Tere Shahar Me Aaye Hai | Ghulam Ali | Hindi Karaoke With Lyrics
Автор: DK Hindi Karaoke
Загружено: 2025-04-09
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Ghazal Lyrics:
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
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हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
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मेरी मंजिल है कहाँ
मेरा ठिकाना है कहाँ
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मेरी मंजिल है कहाँ
मेरा ठिकाना है कहाँ,
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर
मुझे जाना है कहाँ,
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे
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हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह,
हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह
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अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं
जुगनू मैंने
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अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं
जुगनू मैंने,
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं आंसू मैंने,
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे
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हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह,
हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह
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आज की रात मेरा
दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले
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आज की रात मेरा
दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले,
कंप-कंपाते हुए होठों की
शिकायत सुन ले,
आज इज़हार-ऐ-खयालात का मौका दे दे
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हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह,
हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह
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भूलना था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था
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भूलना था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था,
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था,
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे
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हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह,
हम तेरे शहर में आए है
मुसाफिर की तरह,
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
~~~
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
हम तेरे शहर में आए हैं
मुसाफिर की तरह
ऊं~हूँहूँ~ ऊं~हूँहूँ~ ऊं~हूँहूँ~
ऊंहूँहूँ~ हूँहूँहूँ~
~END~
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