परमात्मा की परिभाषा क्या है ? || 🙏राजपिता रामित जी विचार 🙏||
Автор: Mukti Marg
Загружено: 2026-01-28
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🙏धन निरंकार जी 🙏
परमात्मा निराकार (बिना किसी आकार के), सर्वव्यापी, अविनाशी और शाश्वत सत्य है। यह कण-कण में समाया हुआ है, जिसे केवल सतगुरु की कृपा (ज्ञान) से ही जाना जा सकता है। "तू ही निरंकार" (केवल तू ही निराकार प्रभु है) का स्मरण करना ही निरंकारी विचारधारा में ईश्वर को जानने का मुख्य तरीका है।
निरंकारी विचार में परमात्मा की मुख्य विशेषताएं:
• निराकार (Formless): परमात्मा का कोई रूप, रंग या आकार नहीं है, इसलिए वह "निरंकार" है।
• सर्वव्यापी (All-pervading): वह हर प्राणी और सृष्टि के कण-कण में मौजूद है।
• सतगुरु की कृपा: परमात्मा को सांसारिक विद्या से नहीं, बल्कि गुरु द्वारा दिए गए ब्रह्मज्ञान से ही अनुभव किया जा सकता है।
• तीन लाइन का सिमरन: "तू ही निरंकार, मैं तेरी शरण हां, मैनू बख्श लो" (Tu Hi Nirankar, Main Teri Sharan Haan, Mainu Baksh Lo) ही परमात्मा को याद करने और उन्हें समर्पित होने का मूलमंत्र है।
• जीवन का उद्देश्य: इस निराकार परमात्मा को जानना, मानना और अंत में इसी में लीन हो जाना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है।
निरंकारी विचारधारा यह सिखाती है कि परमात्मा से जुड़ने के बाद ही इंसान अहंकार से मुक्त होकर नि:स्वार्थ सेवा और प्रेम का जीवन जी सकता है।
🙏धन निरंकार जी 🙏
Credit :- Sant nirankari mission
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