आखिर क्यों ली 22 वर्ष की आयु में बाल तपस्वी अणसीबाई नें जीवित समाधि सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत RJArvind
Автор: RJ Arvind
Загружено: 2023-02-20
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आखिर क्यों ली 22 वर्ष की आयु में बाल तपस्वी अणसीबाई नें जीवित समाधि सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत - RJArvind
राजस्थान की धरती वीरता शौर्य और बलिदान के लिए जानी जाती है वहीं दूसरी ओर तप व साधना के लिए भी जानी जाती है राजस्थान राज्य के पाली जिले के नाडोल कस्बे में स्थित है अंशी बाई का समाधि स्थल जिन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु में जीवित समाधि धारण कर ली थी
भारतवर्ष में सनातन धर्म हजारों सालों से विद्यमान है इस देश में हजारों महापुरुषों तथा साधु संतों ने जन्म लिया है उनमें से अंशी बाई का अपना अनूठा स्थान है
अंशी बाई का जन्म विक्रम संवत 1981 श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन भुंगरिया मेघवंशी परिवार में हुआ
अंशी बाई के पिता टुआराम भुंगरिया व माता पेपी बाई
अंशी बाई बाबा रामदेव की भक्ति करते थें अणसीबाई ने अपने जीवन काल में अनेक चमत्कार किए तथा लोगों में जन कल्याण की भावना जगाई अंशी बाई ने मात्र 22 वर्ष की आयु में जीवित समाधि धारण कर ली थी विक्रम संवत 2003 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वितीया को समाधि धारण की
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