सच्ची आस कभी बेकार नहीं जाती 🙏 हारे के सहारे खाटू श्याम की चमत्कारी कथा🏵️
Автор: UP16MonuSingh
Загружено: 2026-01-25
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सच्ची आस कभी बेकार नहीं जाती 🙏 हारे के सहारे खाटू श्याम की चमत्कारी कथा🏵️
हारे का सहारा है जो, लखदातार जिसका नाम।
शीश का दानी, कलयुग का अवतारी, मेरा बाबा श्याम॥
विश्वास की डोरी ना टूटे, चाहे टूट जाए ये श्वास।
खाली हाथ नहीं लौटा वो, जिसे थी श्याम पे आस॥
एक वक़्त की सच्ची आस, कभी बेकार नहीं जाती,
बाबा की रहमत भक्तों का, दामन है भर जाती।
सुनो एक भक्त की कथा, जो आँसू लेकर आया था,
जिसने अपनी विपदा का हल, खाटू में पाया था...
सच्ची आस कभी बेकार नहीं जाती...
एक नगर में रहता था, एक भक्त बड़ा ही दीन,
धन-दौलत कुछ पास न थी, पर भक्ति थी रंगीन।
नाम था उसका 'दीनू', बस श्याम-श्याम वो रटता था,
रुखी-सूखी खाकर अपना, जीवन हँसकर कटता था।
पर वक्त की मार पड़ी ऐसी, बेटा बीमार हुआ भारी,
दवा-दारू के पैसे नहीं, थी विपदा बड़ी करारी।
डॉक्टर ने जब हाथ खड़े किए, बोला- "अब कोई आस नहीं,
बचना इसका मुश्किल है, अब सांसे इसके पास नहीं।"
पत्नी रोई, बच्चे रोए, घर में छाया अंधियारा,
तब दीनू को याद आ गया, हारे का वो सहारा।
जेब में फूटी कौड़ी नहीं, पर मन में था विश्वास,
सोचा चौखट पे जाऊँगा, लेकर जीवन की आस।
पैदल ही वो निकल पड़ा, आँखों में नीर बहाते हुए,
"श्याम धणी मेरी लाज रखना", रस्ते में गाते हुए।
पाँव में छाले पड़ गए, पर कदम नहीं वो रोक सका,
भूख-प्यास की पीड़ा को, भक्ति से उसने टोक दिया।
सूरज तपा, आंधी चली, पर 'दीनू' बढ़ता जाता था,
उस "एक वक़्त की आस" को, वो दिल में जगाता जाता था।
मन में था बस एक ही दृश्य, श्याम का पावन धाम,
हौसलों में गूंज रहा था, बस बाबा का नाम।
पहुँच गया जब खाटू नगरी, तोरण द्वार को चूमा,
दर्द का मारा दीवाना, सुध-बुध खोकर घूमा।
भीड़ बहुत थी मंदिर में, पर उसको कुछ न दिखता था,
अपने बेटे का जीवन बस, श्याम के हाथों में दिखता था।
गर्भगृह के सामने जाकर, वो फूट-फूट कर रोया,
बोला- "बाबा आज तलक मैंने, धीरज नहीं है खोया।
पर आज एक बाप की लाचारी, तेरे दर पे आई है,
मेरे घर के आंगन में, आज मौत की परछाई है।
सुना है तेरी चौखट से, कोई खाली नहीं जाता,
एक नज़र तो देख ले सांवरिया, क्या है मेरा नाता।
अगर मेरा लाल चला गया, तो जग हँसेगा तेरे नाम पे,
कलंक कोई लग न जाए, मेरे बाबा तेरे धाम पे।"
उस एक पल में 'दीनू' ने, अपना सब कुछ वार दिया,
अपने आंसुओं का अर्घ्य, श्याम को उतार दिया।
वो एक 'सच्ची आस' थी उसकी, छल-कपट से दूर खड़ी,
जैसे ही उसने माथा टेका, बीती दुख की घड़ी।
मंदिर से एक पुजारी आया, मोरछड़ी को लाया,
दीनू के सिर हाथ फेरकर, उसको गले लगाया।
बोला- "जा पगले घर जा अपने, बाबा ने सुन ली अर्जी,
तेरे दुख अब काट दिए, ऐसी है श्याम की मर्जी।
ये फूल ले जा चरणों का, और बेटे को स्पर्श करा,
तेरा आंगन खुशियों से, फिर से हो जाएगा हरा।"
दौड़ा-दौड़ा घर आया वो, लेकर बाबा का फूल,
देखा बेटा बैठा था, जैसे उड़ी हो सारी धूल।
जो कल तक था मृत्यु-शय्या पर, वो खेल रहा था आज,
श्याम प्रभु ने रख ली थी, उस गरीब भक्त की लाज।
डॉक्टर भी हैरान खड़े थे, ये कैसा चमत्कार हुआ,
जिसका बचना नामुमकिन था, वो कैसे साकार हुआ?
तब दीनू ने हाथ जोड़कर, जग को बात बताई,
ये दौलत से नहीं मिली, ये श्याम कृपा है पाई।
जब सारे रस्ते बंद हों, और कोई न दे जब साथ,
बस एक बार तुम सच्चे मन से, फैला देना हाथ।
वो "एक वक़्त की आस" जो थी, वो बन गई जीवनदान,
तीन बाण के धारी का, है सबसे ऊँचा शान।
इसीलिए कहते हैं प्रेमी, विश्वास न खोना तुम,
सुख हो चाहे दुख हो बन्दे, श्याम के होना तुम।
बोलिए खाटू नरेश की... जय!
हारे के सहारे की... जय!
शीश के दानी की... जय!
श्याम प्यारे की... जय!
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