MERE MAN MAI BAS JAO SIYA RAM| Ram bhajan
Автор: radhesham
Загружено: 2026-03-05
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MERE MAN MAI BAS JAO SIYA RAM| Ram bhajan
LYRICS
वन्दे रामं, रघुकुल नन्दनम्।
सीता-पतिं, भक्त-वत्सलम्॥
श्री राम जय राम, जय जय राम।
मेरे मन में बस जाओ सिया-राम॥
श्री राम जय राम, जय जय राम...
अवध पुरी के तुम हो वासी,
घट-घट के तुम अंतरजामी।
राजीव-नेत्रं, करुणा-सागरम्।
शरणागत-रक्षक, हे दयाकरम्॥
दर्शन दे दो कृपा निधान,
मेरे मन में बस जाओ सिया-राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
हाथ में जिनके कोदंड साजे,
तीनों लोक में डंका बाजे।
रावण-मर्दनं, दुष्ट-विनाशनम्।
मारुति-पूजित, चरण-कमलम्॥
हनुमत के तुम प्राण-आधार,
कर दो इस भव-सागर से पार।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
मोह-माया का अंधियारा भारी,
हर लो विपदा हे धनुर्धारी।
त्वमेव सर्वं, जगदाधारम्।
रामं भजेऽहं, शान्ति-प्रदायकम्॥
सबके स्वामी, सबके राम,
कोटि-कोटि प्रभु तुम्हें प्रणाम।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
वन्दे रामं, रघुकुल नन्दनम्।
सीता-पतिं, भक्त-वत्सलम्॥
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी॥
सियावर रामचन्द्र की जय!
पवनसुत हनुमान की जय!
वन्दे रामं, रघुकुल नन्दनम्।
सीता-पतिं, भक्त-वत्सलम्॥
श्री राम जय राम, जय जय राम।
मेरे मन में बस जाओ सिया-राम॥
श्री राम जय राम, जय जय राम...
अवध पुरी के तुम हो वासी,
घट-घट के तुम अंतरजामी।
राजीव-नेत्रं, करुणा-सागरम्।
शरणागत-रक्षक, हे दयाकरम्॥
दर्शन दे दो कृपा निधान,
मेरे मन में बस जाओ सिया-राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
हाथ में जिनके कोदंड साजे,
तीनों लोक में डंका बाजे।
रावण-मर्दनं, दुष्ट-विनाशनम्।
मारुति-पूजित, चरण-कमलम्॥
हनुमत के तुम प्राण-आधार,
कर दो इस भव-सागर से पार।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
मोह-माया का अंधियारा भारी,
हर लो विपदा हे धनुर्धारी।
त्वमेव सर्वं, जगदाधारम्।
रामं भजेऽहं, शान्ति-प्रदायकम्॥
सबके स्वामी, सबके राम,
कोटि-कोटि प्रभु तुम्हें प्रणाम।
श्री राम जय राम, जय जय राम...
वन्दे रामं, रघुकुल नन्दनम्।
सीता-पतिं, भक्त-वत्सलम्॥
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी॥
सियावर रामचन्द्र की जय!
पवनसुत हनुमान की जय!
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