रेवा तट/पृथ्वीराज रासो/व्याख्या(भाग-4)
Автор: साहित्यिक झरोखा
Загружено: 2026-02-16
Просмотров: 31
Описание:
पृथ्वीराज रासो हिन्दी भाषा में लिखा एक महाकाव्य है जिसमें सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन और चरित्र का वर्णन किया गया है। इसके रचयिता चंदबरदाई पृथ्वीराज के बचपन के मित्र और उनके राजकवि थे और उनकी युद्ध यात्राओं के समय वीर रस की कविताओं से सेना को प्रोत्साहित भी करते थे। इस महाकाव्य में 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं। प्राचीन समय में प्रचलित प्रायः सभी छन्दों का इसमें व्यवहार हुआ है। मुख्य छन्द हैं - कवित्त (छप्पय), दूहा (दोहा), तोमर गोत्र ,त्रोटक, गाहा और आर्या।
पृथ्वीराज रासो में ‘रेवा तट’ 27वाँ समय (सर्ग या अध्याय) है। यह चंदबरदाई द्वारा रचित महाकाव्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें पृथ्वीराज चौहान और चामुंडराय के साथ रेवा (नर्मदा) नदी के तट पर गज-शिकार (हाथियों के शिकार) और युद्ध का वर्णन है।
• हिंदी कविता/इकाई -5/NET,JRF
#hindi#sahitya
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: