मन का आईना | Kabir Bhajan | Sant Kabir Kebol | Sant Kabir Ke Sandesh | Spiritual Bhakti Song 2025”
Автор: kabir kebol
Загружено: 2025-11-03
Просмотров: 22901
Описание:
यह भजन एक गहन आध्यात्मिक संदेश देता है — यह मनुष्य को अंतरात्मा की सफाई और अभिमान, कपट, लोभ, और झूठे आडंबर से मुक्त होने की सीख देता है।
🌿 भजन का सार :-
मन का आईना (आत्मा) तब तक सच्चा नहीं दिखा सकता जब तक उसमें अहंकार, कपट और अभिमान का मैल है।
बाहरी सफाई, सुंदर वस्त्र या पूजा-पाठ का दिखावा बेकार है यदि मन भीतर से गंदा हैं।
भजन का भावार्थ (सरल भाषा में ) :-
🌿 1️⃣ "कपड़ा साफ़ करे दिन-रैन, मन का दाग़ न धोए..."
हम लोग अपने बाहरी रूप, कपड़े, चेहरा तो रोज़ साफ़ करते हैं, पर मन में जो झूठ, ईर्ष्या, और कपट है, उसे नहीं धोते।
अगर भीतर झूठ और अभिमान है, तो बाहर की सजावट बेकार है।
सच्ची सफाई मन की होती है।
🌸 2️⃣ "मंदिर, मस्जिद, गिरजा, देहरा, हर ओर किया पुकार..."
मनुष्य हर जगह भगवान को ढूँढता है — मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में।
पर असल में परमात्मा हमारे निर्मल मन में ही बसता है।
अगर मन शुद्ध नहीं, तो पूजा-पाठ भी केवल दिखावा रह जाता है।
भगवान बाहर नहीं, अपने भीतर है।
🌺 3️⃣ "माया की डोरी में बँधा, नाचत यह संसार..."
यह संसार माया (धन और मोह) की रस्सी में बँधा हुआ नाच रहा है।
हर कोई सोने-चाँदी और वस्तुओं के पीछे भाग रहा है।
जो व्यक्ति इन लोभों से मुक्त हो जाता है, वही सच्चा सुख और शांति पाता है।
त्याग ही सच्चा धन है।
🌺 4️⃣ "नाम बिना जो सांस गिनी,सब व्यर्थ गईपहचान..."
जो मनुष्य जीवन में ईश्वर का नाम नहीं लेता, उसका जीवन व्यर्थ चला जाता है।
सांसें तो सब लेते हैं, पर “नाम-स्मरण” ही जीवन को अर्थ देता है।
सच्चा जीवन वही है जिसमें भक्ति और नाम-समरण हो।
🌼 5️⃣ "धन-दौलत की गठरी बाँधी, समझा इसे सहारा..."
मनुष्य सोचता है कि धन और संपत्ति ही उसका सहारा हैं।
पर मृत्यु के समय सब कुछ यहीं रह जाता है — कुछ भी साथ नहीं जाता।
कबीरदास कहते हैं — जिसने नाम नहीं लिया, वह संसार-धन में डूबकर मर गया।
साथ केवल नाम जाता है, धन नहीं।
🌹6️⃣" नेकी कर, प्रेम जगा ले, यह जीवन चार दिना..."
जीवन बहुत छोटा है — बस कुछ ही दिनों का मेहमान।
इसलिए इसमें झूठ, अहंकार या दिखावा नहीं,
बल्कि *भलाई, प्रेम और सच्ची भक्ति* करनी चाहिए।
भक्ति और प्रेम ही अमर हैं।
🌼 7️⃣" संत बसा है साधु संग में, सुन ले उसकी बात..."
संतों और साधुजनों की संगति में ही ज्ञान और शांति मिलती है।
अगर हम अहंकार और भ्रम छोड़ दें और उनकी वाणी को समझें,
तो हम भी अमृत समान आनंद पा सकते हैं।
सत्संग ही आत्मा की औषधि है।
🌻8️⃣ "समापन: जो प्रीत करे, वही परमात्मा, प्रेम ही उसका रूप..."
ईश्वर का असली रूप “प्रेम” है।
जो प्रेम करता है — वही ईश्वर के निकट है।
जो घृणा और द्वेष रखता है — वह खुद अपने को अंधकार में डालता है।
प्रेम ही परम सत्य है, बाकी सब भ्रम है।
🕉 समापन चौपाई का भावार्थ "मंदिर मन का साफ़ कर, जल दे प्रेम की धार..."
अपने मन के मंदिर को प्रेम, दया और सत्य से धो डालो।
क्षमा और करुणा से भरा मन ही भगवान का असली निवास है।
जब मन निर्मल होगा, तभी ईश्वर का दर्शन होगा।
Related Queries :-
kabir bhajan 2025 new
sant kabir ke bhajan lyrics
kabir das bhajan with meaning
kabir das ke dohe bhajan ke roop me
kabir das ki vani bhajan
kabir das ke prerna bhare bhajan
man ka aaina kabir bhajan
kabir bhajan for meditation
kabir ke bhajan for morning
kabir das bhakti geet
kabir das ke anmol vachan in song form
#ManKaAaina #KabirBhajan #BhaktiSong #KabirDas #SpiritualBhajan #HindiBhajan #SantKabir #KabirKeDohe #SoulfulBhajan #MorningBhajan #KabirVani #PremAurDaya #BhaktiGeet #AdhyatmikBhajan
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: