महाविद्या त्रिपूरा जयंती व रवि पुष्य तंत्र योग पर विशेष तंत्र सिद्धि।
Автор: गृहस्थ तंत्र
Загружено: 2026-01-30
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माघ पूर्णिमा/ भगवती ललिता त्रिपुर सुंदरी की जयंती के दिव्य पर्वकाल के साथ साथ रवि पुष्य का दिव्य अमृत योग है। इस दिन स्नान दान जप हवन का अत्यन्त विशेष महत्व है।
यह दिन सबसे विशेष है देवी साधकों के लिए, इस दिन जगदंबा ललिता त्रिपुर सुंदरी की जयंती है।
जगदंबा के महाविद्या व तांत्रिकी स्वरुपों में सबसे विशिष्ट व मुख्य स्वरुप। माघ पूर्णिमा पर ही भगवती ललिता द्वारा एक कल्प में भगवान श्री कृष्ण को राधा तंत्र की विद्या दी गयी थी, अन्य कल्प अनुसार शरद पूर्णिमा व अन्य कार्तिक पूर्णिमा भी है।
श्रीमद् भगवत गीता का पाठ का महत्व इस तिथि में पुष्य नक्षत्र के कारण और अधिक बढ़ जाता है।
एक स्वरूप दुर्गा में समस्त दस महाविद्या का धारण व एक स्वरूप में मूल महाविद्या का धारण।
इस दिन सूर्योदय पूर्व स्नान करके, सूर्य नारायण को अर्घ्य देकर कुल पितरों की प्रसन्नता हेतु पंचबलि कर्म (गाय कुत्ता कौआ चिंटी व मनुष्य को भोजन देना) करना चाहिए।
भगवती के श्री विग्रह/ यंत्र का अभिषेक, आवरण पूजन, मंडल पूजन, श्रृंगार, जप, पाठ, हवन, तर्पण , अर्चन आदि यथासंभव अधिकाधिक करना चाहिए।
गृहस्थ तंत्र परिवार द्वारा इस रवि पुष्य युक्त माघ पूर्णिमा - ललिता त्रिपुर सुंदरी जयंती के दिन विभिन्न पौराणिक व तंत्रोक्त अनुष्ठान आयोजित किये जा रहें हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता पाठ, संपुट नवचंडी, श्री चक्र तंत्रोक्त सपर्या, हवन आदि पूर्ण होगा। संपूर्ण अनुष्ठान के विकल्प में संकल्पित साधकों को एक तंत्रोक्त देवी माला भगवती के श्री विग्रह के निमित्त भेजा जायेगा, जो गृह विराजित भगवती के श्री दुर्गा/ काली/ ललिता/ लक्ष्मी/ यंत्र आदि पर पहनाया जा सकता है। त्रिवेणी रवि पुष्य में तांत्रिक पूजन के कारण इनका विशेष महत्व रहेगा।
अनुष्ठान हेतु विवरण आप https://www.grihasthpujansamagri.com पर पधारकर दे सकते हैं
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