दादा आनंदपाल की कहानी | Rajasthan - के रॉबिन हुड | Anandpal Singh story | kallu OG
Автор: Kallu OG
Загружено: 2025-04-13
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दादा आनंदपाल की कहानी | Rajasthan - के रॉबिन हुड | Anandpal Singh story | kallu OG
आनंदपाल का जन्म 31 मई 1975 राजस्थान के गाँव सांवराद जिला नागौर में हुआ था। उनके पिता का नाम हुकुम सिंह चौहान और माता का नाम निर्मल कँवर था। वे एक रावणा राजपूत थे।
आनंदपाल पर हत्या, डकैती और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप थे। इन आरोपों के बावजूद, उनकी छवि लोगों के बीच रॉबिन हुड जैसी थी । फेसबुक पर तस्वीरें और यूट्यूब पर उनके वीडियो अपलोड उनकी निडर जिंदगी का सबूत देते हैं।
काला चश्मा, काली टोपी, मूंछें, दाढ़ी, चमड़े की जैकेट और उनकी विशाल और मजबूत शारीरिक बनावट बॉलीवुड स्टाइल के गैंगस्टर जैसी थी।
उनकी पत्नी का नाम राज कंवर है ।
कहा जाता हैं कि
आनंदपाल के गांव के दबंग उसको राजपूत नहीं मानते थे, क्योंकि वो दारोगा यानी रावणा राजपूत समाज से थे । इस जाति के लोगों को आज भी निचले तबके का माना जाता है। यही कारण था कि जब आनंदपाल की बरात घोड़ी पर निकलने के लिए तैयार हुई तो काफी बवाल हुआ।
आनंदपाल ने तब अपने दोस्त और उभरते छात्र नेता जीवणराम गोदारा को अपने गांव बुलाया। गोदारा दलबल के साथ आनंदपाल के गांव पहुंचे और तब जाकर आनंदपाल की बरात घोड़ी पर निकली।
1992 में अपनी शादी के बाद उन्होंने बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की डिग्री हासिल की और सीमेंट का कारोबार शुरू किया। उन्होंने एक डेयरी फार्म चलाया और दूध डेयरी शुरू की। इस दौरान वह राजनीति में भी उतरे।
आनंदपाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं 1999 से 2000 में तब आकार लेने लगीं जब उसने सांवराद गांव के पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा और वो जीते और बाद में लाडनू पंचायत समिति के प्रधान का चुनाव लड़ा। उसे पूर्व कैबिनेट मंत्री हरजीराम बुरड़क के बेटे जगनाथ बुरड़क ने दो वोटों से हराया ।
नवंबर 2000 में लाडनू पंचायत समिति के लिए चुनाव हुए। उस समय आनंदपाल और एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के बीच सीधा टकराव हुआ। आनंदपाल के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने के लिए पुलिस केस दर्ज किया गया था, जब उन्होंने एक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया। आनंदपाल के समर्थकों ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं के दबाव में ऐसा किया गया। उन पर मामले को गैर-जमानती बनाने के लिए धमकी, जबरन वसूली और हिंसा का आरोप लगाया गया था।
लेकिन यहां सोचने वाली बात है कि उनके अपने दोस्त जीवणराम गोदारा की हत्या और सीकर में गोपाल फोगावट की हत्या के मुख्य आरोपी थे।
उनको गिरोह अपहरण और फिरौती के लिए भी जाना जाता था, जहाँ बंधकों को तहखाने में पिंजरों में कैद करके यातनाएँ दी जाती थीं।
2012 में उन्हें जेल में डाला गया, लेकिन 3 सितंबर 2015 को वो भाग निकले जब वह कोर्ट की सुनवाई से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल जा रहे थे । परबतसर के पास खोखर गांव में तीन नकाबपोश लोगों ने पुलिस वैन पर फायरिंग की
इतने आरोपों के बावजूद लोग उन्हें प्रेम और स्नेह करते हैं और दादा आनंदपाल के नाम से उनका नाम बोलते है ।
आनंदपाल विशेष रूप से धन के पुनर्वितरण , गरीबों को देने और अमीरों से चोरी करने के अपने कार्यों के लिए जाना जाते थे । इसके परिणामस्वरूप, उन्हें रॉबिन हुड -प्रकार के व्यक्ति के रूप में ख्याति मिली और अपने कार्यों के लिए निम्न-आय वाले समुदायों के कुछ सदस्यों के बीच समर्थन प्राप्त हुआ।
पुलिस और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 24 जून 2017 को चूरू जिले के मालासर में राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह आतंकवाद निरोधी दस्ते (भारत) द्वारा की गई छापेमारी में आधी रात को उसे गोली मार दी गई थी।
उनके परिवार और कई अन्य लोग आधिकारिक कहानी को खारिज करते हैं और उनकी मौत के लिए पुलिस को दोषी ठहराते हैं।
आनंदपाल की बहन, परिवार और वकीलों ने भी कहा कि आनंदपाल सरेंडर करना चाहता था, लेकिन सरकार खासकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया उसे मरवाना चाहते थे। उन्होंने सरकार, कोर्ट और पुलिस से सुरक्षा की मांग की।
पुलिस मुठभेड़ और मौत:
24 जून 2017 को चूरू जिले के मालासर गाँव में एक पुलिस मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई।
उनके परिवार और समुदाय ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताया और सीबीआई जांच की मांग की। उनका आरोप था कि आनंदपाल आत्मसमर्पण करना चाहता था, लेकिन पुलिस ने उसे मार डाला।
जुलाई 2024 में, एक सीबीआई अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि आनंदपाल ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन उसे गोली मार दी गई।
आनंदपाल सिंह की मौत के बाद राजस्थान में राजपूत समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे।
24 जून 2017 को हुए गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश आया है। जोधपुर की एसीजेएम सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस मुठभेड़ में शामिल तत्कालीन एसपी राहुल बारहट, एडिशनल एसपी विद्या प्रकाश चौधरी, डीएसपी सूर्यवीर सिंह राठौड़, हेड कांस्टेबल कैलाश चंद्र और सोहन सिंह, और कांस्टेबल धर्मपाल और धर्मवीर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने और जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए कहा कि आनंदपाल सिंह के शरीर पर चोट के निशान थे और उसे नजदीक से गोली मारी गई थी, जिससे मुठभेड़ की कहानी पर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आनंदपाल सिंह भले ही एक इनामी बदमाश था, लेकिन उसे पकड़े जाने के बाद उसकी हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट के इस आदेश के बाद आनंदपाल सिंह के परिवार और राजपूत समुदाय ने इसे न्याय की जीत बताया है।
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