Ghazal : Naam ik nafrat ka lekar Lyrics : Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI
Автор: Dr. Bhagia 'Khamosh'- Ghazal
Загружено: 2026-03-09
Просмотров: 129
Описание:
ग़ज़ल - ए - 'ख़ामोश'
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
रोज़ मय पीते हैं फिर भी तशनगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर
कौन जाने क्या मिलेगा मौत के बाद उस जहाँ में
कौन जाने क्या मिलेगा मौत के बाद उस जहाँ में
ज़िन्दगी के नाम पर ये ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर
चाहे मीठा हो या खारा, पानी तो पानी है यारा
चाहे मीठा हो या खारा, पानी तो पानी है यारा
अश्क़ हम पीते हैं फिर भी तशनगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर
तोड़े जाते हैं शिवाले,टूटती हैं मस्जिदें भी
तोड़े जाते हैं शिवाले,टूटती हैं मस्जिदें भी
हर इबादत गाह पर अब बन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर
दिल लगाने के लिये बेताब कितने हम थे 'ख़ामोश'
दिल लगाने के लिये बेताब कितने हम थे 'ख़ामोश'
आज फिर ये क्या हुआ है, दिल-लगी क्यूँ रो रही है
रोज़ मय पीते हैं फिर भी तशनगी क्यूँ रो रही है
नाम इक नफरत का लेकर ज़िन्दगी क्यूँ रो रही है
नाम एक नफरत का लेकर
डॉ भागिया 'ख़ामोश'
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: