Mere Bane ki baat na puchho- Traditional Nizami Brothers
Автор: Sufinama by Rekhta
Загружено: 2019-10-09
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कामिल शत्तारी-
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मेरे बन्ने की बात न पूछो मेरा बन्ना हरियाला है
ख़ुसरव-ए-ख़ूबाँ सरवर-ए-आलम ताज शफ़ाअत वाला है
हुस्न के चर्चे उस के दम से रौनक़-ए-आलम उस के क़दम से
नूर के साँचे में क़ुदरत ने उस को कुछ ऐसा ढाला है
फैला हुआ है दामन-ए-रहमत कितनी ख़ुश-क़िस्मत है ये उम्मत
सारे गुनहगारों पर उस ने कमली का पर्द: डाला है
देखो उसी के नूर से दो-जग जगमग जगमग जगमग जगमग
उस के रुख़-ए-रौशन ही से तो ये सारा उजियाला है
मय से भरे पैमाने हैं या मुस्तक़िलन मय-ख़ाने हैं
आँखों में आँखें मेरे बने की कौन ऐसा मतवाला है
नबी वली सब उस के बराती किस में उस की बात है आती
'कामिल' मेरा राज-दुलारा सब से अरफ़ा-ओ-आ'ला है
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