भारतीय आयुर्वेदिक औषधीय पौधा Indian Ayurvedic Medicinal plant
Автор: Rimi's Garden
Загружено: 2025-01-29
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Описание: Many plants are used in Ayurveda, an Indian traditional system of medicine.Our medicinal plant database provides information on scientific name, family, vernacular name, medicinal uses, location of species and images of herbarium.The alternative medicines in the traditional systems are derived from herbs, minerals, and organic matter, while for the preparation of herbal.India has a long history of traditional medicine, and Ayurveda is the most representative system. Similar to traditional Chinese medicine, Ayurveda is a life science derived from experience. It emphasizes that human health requires both personalized medicine and a holistic approach.The basic theories of Indian medicine are the five elements theory and the three humoralisms theory. The five elements theory is a natural philosophy in Vedic culture that is used in medicine to explain human physiology. The five elements theory holds that everything in the world is composed of five basic elements—Prithvi (earth), Jala (water), Agni (fire), Vayu (air), and Akasha (ether)—that supplement the corresponding elements in the human body after being ingested.According to the three humoralisms theory, there are three kinds of humoralisms—(Tridosha) gas (Vata), bile (Pitta), and mucus (Kapha)—the balance of which determines the health and disease status of the human body. Disease is caused by internal and external factors leading to an imbalance of the three humoralisms, and the treatment is to restore their balance by means of medicine and diet therapy.आयुर्वेद में कई पेड़ पौधों का इस्तेमाल दवाओं के तौर पर किया जाता है। ऐसे कई पौधे हैं जो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करते हैं।आयुर्वेद में सदियों से जड़ी-बूटियों और पौधों का उपयोग औषधियों के रूप में किया जाता रहा है। ये पौधे न केवल बीमारियों को ठीक करने में मदद करते हैं, बल्कि इनका नियमित सेवन लाइफस्टाइल से जुड़ी कई समस्याओं को भी दूर करता है। आज की हेक्टिक लाइफस्टाइल में हम तेजी से बदलती बीमारियों का सामना कर रहे हैं, और आयुर्वेद इन समस्याओं का नेचुरल और इफेक्टिव सॉल्यूशन प्रदान करता है। औषधीय पौधे , जिन्हें औषधीय जड़ी-बूटियाँ भी कहा जाता है, प्रागैतिहासिक काल से ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में खोजे और इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। पौधे विभिन्न कार्यों के लिए सैकड़ों रासायनिक यौगिकों का संश्लेषण करते हैं, सर्पगन्धा:- इस पौधे का उपयोग उच्च रक्तचाप, चिंता और अनिद्रा के उपचार में किया जाता है। पारंपरिक औषधीय प्रणाली में, इसका उपयोग सांप के काटने, कीड़े के काटने, बुखार, कब्ज और मलेरिया के लिए भी किया जाता है। इसे यकृत रोग, संधिशोथ, एडिमा और मिर्गी के इलाज में भी उपयोगी माना जाता है।सर्पगंधा के ज़बरदस्त फायदे:-साँप अगर काट ले तो जहर से पहले आदमी डर से ही मर जाता है, लेकिन यदि आप सर्पगंधा के उपयोग के बारे में जानते हों तो आप न तो डर से मरेंगे और न ही जहर से। सर्पगंधा की जड़ी साँप के विष को उतारने की एक अच्छी दवा है। सर्पगंधा के बारे में अनेक रोचक कथाएं प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए कहा जाता है कि कोबरा से लड़ने से पहले नेवला सर्पगंधा की पत्तियों का रस चूस कर जाता है। पहले इसे पागलों की दवा भी कहा जाता था क्योंकि सर्पगंधा के प्रयोग से पागलपन भी ठीक होता है।सर्पगंधा क्या है?पारंपरिक औषधियों में सर्पगंधा एक प्रमुख औषधि है। भारत में तो इसके प्रयोग का इतिहास 3000 साल पुराना है। सर्पगंधा स्वाद में कड़ुआ, तीखा, कसैला और पेट के लिए रूखा तथा गर्म होता है। सर्पगंधा एक छोटा चमकीला, सदाबहार, बहुवर्षीय झाड़ीनुमा पौधा है जिसकी जड़े मिट्टी में गहराई तक जाती हैं। जड़े टेढ़ी-मेढ़ी तथा करीब 18-20 इंच लम्बी होती है। जड़ की छाल भूरे-पीले रंग की होती है। जड़ गंधहीन और काफी तीखी तथा कड़वी होती है। पौधे की छाल का रंग पीला होता है।
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