Hunted Room number 13, Horror Stories.
Автор: हिंदी कहानियां
Загружено: 2025-06-05
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शिमला की पहाड़ियों में बसा था एक सौ साल पुराना बोर्डिंग स्कूल — सेंट एडमंड्स हॉस्टल, जो बाहर से जितना खूबसूरत लगता, उतना ही भीतर से ठंडा, चुप और रहस्यमय था। यहाँ का सबसे पुराना हिस्सा था विंटेज ब्लॉक, और वहीं था कमरा नंबर 13, जिसे सालों से बंद रखा गया था।
"वो कमरा नहीं, एक भूल है जिसे सबने छुपा रखा है," किसी ने एक बार फुसफुसा कर कहा था। और अब, उसी हॉस्टल में नया छात्र आरव दाखिल हुआ था।
आरव जिज्ञासु था, अकेला था, और नए माहौल में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा था। एक रात हॉस्टल की कैंटीन में, जब बाकी लड़के डरावनी कहानियों पर हँस रहे थे, तभी वरुण नाम का एक सीनियर उसके पास आकर बैठा।
"कमरा नंबर 13 देखा क्या?" वरुण ने धीमे स्वर में पूछा।
"नहीं, वो तो बंद है। क्यों?"
"उस कमरे में कोई रहता है..."
आरव ने हँसने की कोशिश की, पर वरुण की आँखों में जो चमक थी, वो मज़ाक की नहीं थी।
"एक बार झाँक कर देखना, अगर हिम्मत हो तो। बस खिड़की से।"
अगली रात, बारिश तेज़ थी। हॉस्टल की लाइटें टिमटिमा रही थीं। आरव अकेले ही उस ब्लॉक की ओर चला गया। पुराने लकड़ी के दरवाज़े पर जंग लगी थी, लेकिन खिड़की के जाले जैसे हाल ही में हटे हों। आरव ने खिड़की से झाँका... और उसका दिल थम गया।
कमरे के भीतर कोई था — एक लड़की, सफेद फ्रॉक में, बाल चेहरे पर बिखरे हुए, और वह दीवार की ओर देख रही थी।
अगली सुबह वह बीमार पड़ गया। बुखार, कंपकंपी, और अधजगी नींद में वो सिर्फ एक ही नाम बड़बड़ाता रहा —
"अनया... अनया..."
किसी ने उसे ये नाम नहीं बताया था।
वार्डन शर्मा ने सख्त आदेश दिया — "कमरा नंबर 13 की तरफ कोई नहीं जाएगा!"
लेकिन आरव अब वहाँ खिंचने लगा था। उसे सपनों में वही लड़की दिखती, वही कमरे की ठंडी दीवारें, और कभी-कभी तो लगता, उसके कानों में फुसफुसाहट होती है।
वरुण ने आखिरकार सच्चाई बताई —
"साल 1998 में एक छात्रा — अनया — ने आत्महत्या कर ली थी। कमरा नंबर 13 में। उसकी चीखें कई रातों तक सुनाई देती थीं। जब एक और छात्र उसी कमरे में पागल हो गया, तब उस कमरे को बंद कर दिया गया।"
एक रात, आरव फिर खिड़की के पास पहुँचा।
लेकिन इस बार दरवाज़ा खुला था।
कमरे में घुसते ही जैसे वक़्त थम गया हो। हवा स्थिर थी। दीवार पर अब भी वही निशान थे — खरोंचें, एक नाम बार-बार उकेरा हुआ: "अनया"।
और फिर अचानक, दरवाज़ा बंद हो गया।
कमरा ठंडा नहीं, बर्फ़ सा हो गया।
पीछे से एक आवाज़ आई — "तुम आ गए?"
अगली सुबह, हॉस्टल में सनसनी फैल गई।
आरव गायब था।
कमरा नंबर 13 का दरवाज़ा फिर बंद था — जैसे सालों से कभी खुला ही नहीं हो।
कोई कुछ नहीं बोला, पर एक लड़का था जिसने उस रात कमरे के भीतर से चीख सुनी थी —
"मुझे मत बुलाओ... मुझे मत बुलाओ..."
आज भी जब तेज़ बारिश होती है, हॉस्टल की खिड़कियों पर कोई थपथपाता है।
और कभी-कभी, कमरे नंबर 13 की खिड़की में एक धुँधली परछाई दिखती है —
सफेद फ्रॉक में, दीवार की ओर देखती हुई।
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