कुछ लोग गज़ब के स्वाभिमानी होते हैं | प्रेरक कहानी | अरुणा सब्बरवाल - ललक | | Simmi Saini
Автор: Katha Sahitya Pro
Загружено: 2026-01-09
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अरुणा सब्बरवाल की कहानी - ललक | प्रेरक कहानी | Aruna Sabharwal | Simmi Saini@kathasahityapro
लेखिका - अरुणा सब्बरवाल
अरुणा सब्बरवाल पूरी तरह से ब्रिटेन की हिन्दी लेखिका हैं कयोंकि उन्होंने अपने हिन्दी साहित्यिक लेखन की शुरूआत बर्मिंघम में आयोजित एक कहानी कार्यशाला में शिरक़त करने के बाद ही की।पच्चीस वर्ष मुख्यधारा के विद्यालयों में और पांच वर्ष स्पेशल एजुकेशनल नीड्स के विद्यालयों में शिक्षण कर रही अरुणा जी का अधिकांश कार्य अंग्रेज़ी भाषा में ही होता था।
उनकी पहली कहानी “वे चार पराँठे” रवीन्द्र कालिया द्वारा संपादित पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’ में प्रकाशित हुई । धीरे धीरे उनकी कहानियाँ अन्य साहित्यिक पत्रिकाओं जैसे कि वागर्थ, कथाकर्म, संचेतना, आदि में निरंतर प्रकाशित होने लगीं।
2008 में उनकी जो साहित्यिक यात्रा शुरू हुई, उसके नतीजे में अब तक अरुणा जी की पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं .
कविता संग्रह: (२०१०) सांसो की सरगम, (२०११) बाँटेंगे चंद्रमा
कहानी संग्रह (२०१०) कहा–अनकहा, (२०१४) वे चार पराँठे, (२०१७) उडारी।(2021 ) सुलगते सवाल (2022) रॉकिंग चेयर (2022) क्लब क़्रोलिंग ।
सम्मान :
२००८ साहित्यक संस्कृत परिषद मेरठ .
२००८ अक्षरम ७ वां अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव .
२००९ अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ ,उतर प्रदेश .
२०१० मान-पत्र ,उच्चायोग लंदन
२०११ यू .के हिन्दी सम्मेलन ...२४ ...२६ जून बर्मिंघम विशिष्ट सम्मान से अलंकृत
२०१६ कथा यू .के द्वारा आयोजित कथा गोष्ठी में उनकी कहानी “उडारी “ का पाठ अत्यंत सफ़ल रहा। सभी लेखकों से बहुत सराहना मिली ।
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