था उस योगी का चेहरा चेहरे पर रंग सुनहरा । स्वर - @ श्री कुलदीप भास्कर जी @ । स्त्री आर्य समाज हिसार
Автор: Vaidik Darpan Hisar
Загружено: 2026-02-07
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Anurag Arya mo. - 7988687245 ( Gurukul Aryanagar Hisar Haryana )
भजन
था उस योगी का चेहरा , चेहरे पर रंग सुनहरा ।
देख के उन आँखों को , ना सामने पापी ठहरा ।
तारीफ करूँ क्या उसकी , जिसने हमें जगाया ।।
1 - दयानन्द था अद्भुत शक्ति , यूँ लोग कहा करते थे ।
वो आ ना जाए काशी , सब पोप डरा करते थे ।
है उसकी जुबां पर कोई , ऐसा बला का जादू ।
शास्त्रार्थ में उस पर कोई , पा न सका है काबू ।।
2 - जब पहुँच गया वो काशी , पोपों का दल घबराया ।
सब के मुँह पर थी चर्चा , दयानन्द यहाँ अब आया ।
थी दहशत गालिब सब पर , जितने पुजारी पण्डे ।
देखा स्वामी जी को , भूल गये सब हथकण्डे ।।
3 - दीनों दलितों विधवाओं का , वो बनके मसीहा आया ।
प्रचार किया वेदों का , सोया हुआ संसार जगाया ।
थी ओ३म् पताका सर पर , और बढ़ते गए ब्रह्मचारी ।
क्या लोग सताये इनको , ऐसे थे बलशाली ।।
4 - आने को तो इस दुनियाँ में , महापुरुष बहुत आते थे ।
बेदाग दयानन्द जैसा , जीवन ना देख पाते हैं ।
निर्दोष गया वो जग से , कोई दोष ना उसमें पाया ।
दयानन्द सा `` वेदी ʼʼ , कोई दयानन्द ही पाया ।।
था उस योगी का चेहरा , चेहरे पर रंग सुनहरा ।
देख के उन आँखों को , ना सामने पापी ठहरा ।
तारीफ करूँ क्या उसकी , जिसने हमें जगाया ।।
स्वर - आर्य जगत के एवं भारत सुविख्यात वैदिक भजनोपदेशक आदरणीय @ श्री कुलदीप भास्कर आर्य जी @ घरौंडा करनाल ( हरियाणा ) भारत । mo. - 9050201774
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