सीखें राग भैरव की बंदिश घर बैठे बहुत ही आसानी से || Raag bhairav tutorial || easy tutorial
Автор: Swar Amrit Academy
Загружено: 2025-10-09
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🎵 Learn Raag Bhairav Bandish | रैन गई अब जागो प्यारे| Easy Harmonium Tutorial
In this video, you’ll learn Raag Bhairav bandish step-by-step with swaras and rhythm.
Perfect for beginners learning Indian classical music and harmonium at home.
🎶 Taal – Teentaal
🎶 Raag – Bhairav
🎶 Level – Beginner
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राग भैरव भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक 'उत्तरांगवादी' और 'आश्रय' राग है, जो भैरव थाट से उत्पन्न होता है और जिसका गायन समय प्रात:काल है. इसमें कोमल ऋषभ (रे) और कोमल धैवत (ध) लगते हैं, जबकि अन्य स्वर शुद्ध होते हैं. यह अपनी गंभीर और ध्यानपूर्ण प्रकृति के लिए जाना जाता है, और इसे सुबह के समय 'संधि प्रकाश' के रूप में बजाया जाता है।
विशेषताएँ -
स्वर: इस राग में कोमल ऋषभ (रे) और कोमल धैवत (ध) का प्रयोग होता है, और अन्य सभी स्वर शुद्ध होते हैं.
जाति: यह एक संपूर्ण राग है, जिसका अर्थ है कि इसके आरोह (चढ़ाई) और अवरोह (उतार) दोनों में सभी सात स्वर लगते हैं।
वादी और संवादी स्वर: वादी स्वर धैवत (ध) है और संवादी स्वर ऋषभ (रे) है, इसलिए इसे उत्तरांगवादी राग भी कहा जाता है।
आश्रय राग: इसे अपने थाट (भैरव थाट) का जनक राग या आश्रय राग भी कहा जाता है, क्योंकि यह उसी थाट से उत्पन्न हुआ है।
समकक्ष राग: कर्नाटक संगीत में राग भैरव के समकक्ष राग को 'मायामालवगौला' कहा जाता है।
महत्व: राग भैरव को 'प्रातःकालीन रागों का राजा' माना जाता है और यह कई अन्य रागों जैसे अहीर भैरव, आनंद भैरव आदि का जनक भी है।
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