जो जितना होशियार है, वो उतना मूरख होगा || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति (बौद्ध दर्शन) पर (2024)
Автор: आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
Загружено: 2024-07-16
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वीडियो जानकारी: 09.07.24, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नॉएडा
जो जितना होशियार है, वो उतना मूरख होगा || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति (बौद्ध दर्शन) पर (2024)
📋 Video Chapters:
0:00 - Intro
1:04 - सत्य और झूठ का संघर्ष
1:35 - मस्तिष्क में बसे अनंत विचार
12:20 - बच्चों को परोसे जाने वाली विषाक्त शिक्षा
21:36 - मान्यता का तराज़ू,
27:02 - संयोग और विवेक
35:55 - निर्मल और सरल जीवन
41:18 - तथ्यों की जांच और मान्यताओं को चुनौती
42:12 - मनोवैज्ञानिक पूर्वाग्रहों का अवलोकन
47:03 - समापन
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य प्रशांत एक युवा महिला की कहानी साझा करते हैं, जो अपने पहले प्यार के प्रति अपनी वफादारी को लेकर आत्महत्या करने की सोच रही थी। वह अपने बचपन के प्रेमी के साथ किए गए कमिटमेंट को लेकर बहुत परेशान है, जबकि वह अब एक सफल डॉक्टर बन चुकी है और उसके जीवन में एक नया साथी भी है। आचार्य जी इस स्थिति के माध्यम से यह समझाते हैं कि कैसे हम अपने पूर्वाग्रहों और पुराने रिश्तों के प्रति अटके रहते हैं, जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।
आचार्य जी बताते हैं कि सत्य को समझने के लिए हमें अपने पूर्वाग्रहों और मान्यताओं को छोड़ना होगा। वे यह भी बताते हैं कि मनुष्य की सोच में कई विरोधाभास होते हैं, और यह कैसे हमारे भीतर के सत्य को प्रभावित करते हैं। वे यह स्पष्ट करते हैं कि सत्य को जानने के लिए हमें अपने मन में पहले से भरे हुए विचारों को हटाना होगा, ताकि हम नए विचारों को स्वीकार कर सकें।
आचार्य जी ने यह भी कहा कि जो लोग सत्य की खोज में हैं, उन्हें अपने पुराने विश्वासों को चुनौती देने के लिए तैयार रहना चाहिए। अंत में, वे यह बताते हैं कि सत्य को जानने के लिए हमें अपने मन की सीमाओं को पार करना होगा और अपने भीतर की गहराइयों में जाकर सच्चाई को पहचानना होगा।
प्रसंग:
~ संसार किसने बनाया?
~ मनुष्य को जीवन क्यों मिला है?
~ हम इस धरती के लायक भी हैं?
~ पूरे संसार का उद्देश्य क्या है?
~ दुनिया में भोगवाद क्यों बढ़ रहा है?
~ पृथ्वी में हाहाकार क्यों मचा हुआ है?
शून्यता सप्तति छंद 18
पूर्व पक्षी का कहना है कि: यदि वस्तु शून्य है तब उसकी उत्पत्ति और विनाश संभव नहीं है। जो स्वभाव से ही शून्य है वह कैसे उत्पन्न या विनष्ट हो सकता है ?
Opponent: If things were empty, origination and cessation would not occur. That which is empty of its own being: How does it arise, and how does it cease?
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शून्यता सप्तति छंद 19
माध्यमिक का कथन है कि: भाव और अभाव एक साथ नहीं रह सकते। अभाव के न होने पर भाव संभव नहीं है। भाव और अभाव सदा विद्यमान हैं। अतः अभाव पर निर्भरता के बिना भाव संभव नहीं है।
Reply: Being and non-being are not simultaneous. Without non-being, there is no being. Being and non-being would always be. There is no being independent of non-being.
शून्यता सप्तति, छंद: 18 & 19
संगीत: मिलिंद दाते
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