ग़बन । भाग 36। प्रेमचन्द | Gaban | Part 36 | Premchand | @KahaniBreak-n2l
Автор: KahaniBreak
Загружено: 2026-02-18
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मुंशी प्रेमचन्द का उपन्यास ग़बन एक यथार्थवादी रचना है , जिसमें उन्होंने मध्यमवर्गीय समाज की आभूषण प्रियता, भ्रष्टाचार, पुलिस की दमनकारी नीति, क़र्ज़ आदि से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को उठाया है, यह उपन्यास दो कथानकों पर आधारित है, एक प्रयाग और कोलकाता से जुड़ा हुआ है।
ग़बन उपन्यास की कहानी रमानाथ और उसकी पत्नी ज़ाल्पा की है। रमानाथ सुन्दर, सुख सुविधा चाहने वाला और नैतिक रूप से कमजोर है। ज़ाल्पा को बचपन से ही आभूषणो ख़ासकर की चंद्र्हार की लालसा होती है। वह सपने देखती है कि शादी के समय उसे चढ़ावे में चंद्रहार जरुर चढेगा । लेकिन जब उसकी शादी नौकर मुंशी दयानाथ के बेटे रमानाथ से होती है तो चढ़ावे में चंद्रहार नहीं होता और ज़ाल्पा को बहुत निराशा होती है । रमानाथ अपनी पत्नी को खुश करने के लिए गहने कर्ज पर लेता है , पर समय पर नहीं चुकाने के कारण उसे ग़बन करने पर मजबूर होना पड़ता है ।
इस प्रस्तुति को सुनने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। 😊
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