09. निर्जरा भावना मुनि श्री 108 क्षमा सागर जी महाराज के प्रवचन (Barah Bhavna) Pravachan
Автор: Shubham Jain
Загружено: 2019-08-07
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बारह भावना
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य
मुनि श्री 108 क्षमा सागर जी महाराज के प्रवचन
निर्जरा भावना
Nirjara bhayana
ज्ञान - दीप तप - तेल भर , घर शोधे भ्रम - छोर | |
या - विध बिन निकसे नहीं , पैठे पूरब - चोर | |
jhana - dipa tapa - tela bhara , ghara Sodhen bhrama - chora |
Ya - vidha bina nikase nahim , paithe puraba - cra | |
पंच - महाव्रत संचरण , समिति पंच - परकार |
प्रबल पंच - इन्द्रिय - विजय , धार निर्जरा सार | | 9| |
Panca - mahavrata sancarana , samiti panca - parakara |
Prabala panca - indriya - vijaya , dhara nirjara sara | | 9 | |
पंडित श्री दोलतराम जी छह ढाला में लिखते हैं
निर्जरा भावना
निज काल पाय विधि इारना , तासो निजकाज न सरना ।
तप करि जो कर्म खपावे , सोई शिवसुख दरसावे । ।
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