Guru mantra
Автор: Ishaa(A formless Divinity
Загружено: 2026-02-01
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[Instrumental]
गुरुर्ब्रह्मा , गुरुर्विष्णु , गुरुर्देवो महेश्वरः ,
गुरु साक्षात् परं ब्रह्म , तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
मैं जहाँ रहूँ , मैं जहाँ चलूँ , जो साथ सदा मेरे साथ रहे ।
जो वस्त्र बदलूँ , जो रूप धरूँ, पर भीतर दीप जलाता रहे ॥
आज भी रोया हूँ शरणागति में ,
बिन चरण-स्पर्श , बिन संग वास ।
गुरु ही बस् मेरा श्वास ॥
दुनिया पूछे – “कैसा गुरु?”
जो दिखे नहीं, जो पास नहीं।
मैं कह दूँ—वो परमात्मा है ,
हर कर्म में है, हर श्वास में है॥
जहाँ काम करूँ , जहाँ नाम कमाऊँ , हर निर्णय में वो मौन बसे। अदृश्य रूप में भीतर बैठा , हामारे अहंको हर क्षण तोडे॥
गुरु-बुद्धि बिना बस अहंकार , ज्ञान नहीं—केवल भारी भार।
गुरु की दृष्टि जब तक न मिले , कैसे मिटे मन का अंधकार ?
गुरु-संनिधि में जीवन सीखे , झुकना क्या है, प्रेम क्या ।
गुरु न हो तो कैसे जाने , भक्ति क्या है, नेह क्या ॥
मंदिरमें भी, आश्रम में भी, साथ रहा उनके हर क्षण।
आज भी वही गुरु हैं, मेरे जीवन का एकमात्र वरण॥
मैं जहाँ जियूँ , मैं जहाँ मरूँ , उस सत्य को नमन करूँ ।
जो भीतर है, जो बाहर है , मैं उसी गुरु को वंदन करूँ ॥
हे गुरु,
दिखो न दिखो,
साथ रहो न रहो
पर मेरा होना, आपसे ही है…
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः,
गुरु साक्षात् परं ब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
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