SC ST Act- 1989|अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम-1989
Автор: Harish Academy
Загружено: 2020-01-04
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SC ST Act- 1989|अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम-1989
1-प्रारंभिक धारा-1 संक्षिप्त नाम- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989
विस्तार- J&K छोड कर संम्पूर्ण भारत में
लागू- 11 sep 1989 / 30 jan 1990 से लागू
धारा-2 परिभाषाऐं- (क)अत्याचार- धारा-3 (ख)संहिता-CRPC (ग) SC/ST - 366(24)(25)
(क)विशेष न्यायालय- धारा-14 (क)विशेष लोक अभियोजन- धारा-15
2- अत्याचार के अपराध धारा-3 अत्याचारों के लिए दण्ड- (1)प्रत्यक्ष- कोई भी ब्यक्ति जो ST/ST का नही है वह अपराध करता है- 6माह-5वर्ष+जुर्माना
(2)अप्रत्यक्ष- कोई भी ब्यक्ति जो ST/ST का नही है वह अपराध करता है- 1वर्ष से 7 वर्ष/म्रत्युदंण्ड
धारा-4 कर्तब्यों की उपेक्षा के लिए दण्ड - जान बूझ कर लेट लतीफ करना(6माह से 1वर्ष) कर्तब्य-धारा-4(2)
धारा-5 पश्चातवर्ती दोष सिघ्द के लिए दण्ड - बार बार अपराध दोहराना(कम से कम 1वर्ष) अधिकतम-जो सजा निर्धारित है
धारा-6 भारतीय एण्ड संहिता के कतिपय उपबंधों का लागू होना- जो परिभाषा नही है वह CRPC/IPC से ली जाएगी
धारा-7 कतिपय व्यक्तियों की संम्पत्ती का समपहरण-
धारा-8 अपराधों के बारे में उपधारण- prof न करने पर दोषी
धारा-9 शक्तियों का प्रदान किया जाना- पुलिस अधिकारी को
3-निस्काशन धारा-10 ऐसे ब्यक्ति को हटाया जाना जिसके द्वारा अपराध किए जाने की संभावना है - 3वर्ष के लिए हट जाना
धारा-11 किसी ब्यक्ति के द्वारा संबंधित क्षेत्र से न हटने पर प्रकिया
धारा-12 ऐसे ब्यक्ति जिसके विरूध धारा-10 के आधीन आदेश दिया गया है फोटो व माप लेना
धारा-13 धारा 10 के आधीन आदेश के पालन न करने के लिए सजा (1वर्ष)
4-विशेष न्यायालय धारा-14 विशेष न्यायालय -राज्य सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की परामर्श से विशेष न्यायालय की ब्यवस्था करेगी
धारा-15 विशेष लोक अभियोजन- राज्य सरकार द्वारा वकील जिसे 7 वर्ष का अनुभव हो नियुक्त करेगी
5-
प्रकीर्ण धारा-16 राज्य सरकार की सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति धारा-17 विधि व व्यवस्था तंत्र द्वारा निवारक कार्यवाही-DSP/SDM
धारा-18 अधिनियम के आधीन अपराध करने वाले शक्तियों पर संहिता की धारा 438 लागू न होना- गिरफतारी पूर्व जमानत
धारा-19 अधिनियम के आधीन अपराध करने वाले शक्तियों पर संहिता की धारा 360 लागू न होना-परवीक्षा अधिनियम के उपवंध18+
धारा-20 अधिनियम का अन्य विधियों पर अध्यारोही होना- जो कानून लागू है उसी के तहत सजा
धारा-21 अधिनियम का प्रभावी कियान्वन सुनिश्चित करने का राज्य सरकार का कर्तव्य
धारा-22 सदभावना पूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण
धारा-23 नियम बनाने की शक्ति केन्द्र के पास
अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष - नन्दकुमार साय
अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष - रामशंकर कठेरिया
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