श्रीमद भगवद गीता अध्याय 17 की सीख | Life Changing Lessons of Bhagavad Geeta Chapter 17 Bhagwat Geeta
Автор: Gita Saaram
Загружено: 2026-01-15
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अध्याय 17 – श्रद्धात्रय विभाग योग
श्रीमद भगवद गीता अध्याय 17 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि इंसान की श्रद्धा उसके स्वभाव और जीवन को तय करती है।
यह अध्याय श्रद्धा को तीन गुणों से जोड़ता है— सात्त्विक, राजस और तामस।
🌿 इस अध्याय की मुख्य सीख:
✔ सात्त्विक श्रद्धा – शुद्ध, शांत, भलाई और सत्य की ओर ले जाती है
✔ राजस श्रद्धा – फल, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रेरित करती है
✔ तामस श्रद्धा – अज्ञान, आलस्य और भ्रम को बढ़ाती है
✔ भोजन, यज्ञ, दान और तप भी तीन गुणों में बंटते हैं
✔ सही श्रद्धा व्यक्ति को ईश्वर और सफलता के मार्ग पर ले जाती है
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🙏 यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि जैसी हमारी श्रद्धा, वैसा हमारा जीवन।
ईश्वर में विश्वास, सत्य में स्थिरता और कर्म में पवित्रता मनुष्य को महान बनाती है।
🕉 सात्त्विक मार्ग अपनाने से जीवन शांति, शक्ति और परम आनंद से भर जाता है।
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