ARGLA STOTRM - अर्गला स्तोत्रम् - दुर्गासप्तशती
Автор: Sanatan Sangrah
Загружено: 2026-01-09
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ARGLA STOTRM - अर्गला स्तोत्रम् - दुर्गासप्तशती
अर्गला स्तोत्र का पाठ नवरात्रि के दौरान, ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या संध्या काल (शाम) में करना अत्यंत शुभ माना जाता है, खासकर जब इसे दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ किया जाए; यह घर की सुरक्षा, शत्रुओं पर विजय और मनोकामना पूर्ति के लिए लाभकारी है, जिसे प्रतिदिन या विशेष कामनाओं के लिए संकल्प के साथ किया जा सकता है।
कब करें
नवरात्रि: यह पाठ नवरात्रि के नौ दिनों में अत्यधिक फलदायी होता है, क्योंकि यह देवी दुर्गा की कृपा पाने का विशेष समय होता है।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह): सूर्योदय से पहले (लगभग 4:30 - 6:00 बजे) यह पाठ करना बहुत शुभ होता है, जब वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है।
संध्या काल (शाम): सूर्यास्त के समय भी इसका पाठ करना शक्तिशाली माना जाता है, जब दैवीय ऊर्जाएं सक्रिय होती हैं।
दिन का कोई भी समय: आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन सुबह-शाम का समय अधिक प्रभावशाली होता है।
कैसे करें?
दुर्गा सप्तशती के साथ: अर्गला स्तोत्र का पाठ दुर्गा कवच के बाद और कीलक स्तोत्र से पहले किया जाता है, जब आप दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हों।
संकल्प लेकर: किसी विशेष कार्य (जैसे शत्रुओं से रक्षा, धन प्राप्ति) के लिए आप संकल्प लेकर इसका पाठ कर सकते हैं।
संख्या (Counts): नवरात्रि में 9, 108 या अपनी क्षमतानुसार पाठ कर सकते हैं; कुछ लोग विशिष्ट मंत्रों का 5 या 7 बार पाठ करते हैं।
श्रद्धा और विधि: सही विधि और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ ही पूर्ण फल देता है, संस्कृत में पाठ करना अधिक अच्छा माना जाता है।
लाभ:
घर की सुरक्षा, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव।
शत्रुओं पर विजय (बाहरी और आंतरिक शत्रु जैसे भय, ईर्ष्या)।
धन, विद्या और यश की प्राप्ति।
मनोकामनाओं की पूर्ति (यह कल्पवृक्ष के समान है)।
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