मांस और शराब का सेवन सही है या गलत जाने |
Автор: Philosophy & life lessons
Загружено: 2026-01-19
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Описание:
ओशो के अनुसार, मांस और शराब का सेवन आध्यात्मिक मार्ग में बाधा डालता है, क्योंकि यह इंद्रियों को प्रबल करता है और हिंसा की भावना जगाता है, जिससे व्यक्ति की चेतना नीचे गिरती है; उन्होंने मांस को तामसिक भोजन माना और शराब को भी क्षणभंगुर आनंद देने वाली बताकर इससे दूर रहने की सलाह दी, पर जबरदस्ती त्याग का कोई अर्थ नहीं, वह अंतर्मन से आना चाहिए, यही उनका संदेश था।
🌟🌟मांस के बारे में ओशो के विचार:
🌟मानव शरीर के लिए अनुपयुक्त:
ओशो का मानना था कि मनुष्य के दांत, आंतें और पाचन तंत्र मांसाहार के लिए नहीं बने हैं।
🌟हिंसा और क्रोध:
मांस खाने से शरीर में अम्लता बढ़ती है और व्यक्ति में क्रोध, आक्रोश और हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है, जो उसकी आध्यात्मिकता को प्रभावित करती है।
🌟आध्यात्मिक बाधा:
यह व्यक्ति की चेतना को नीचे लाता है और उसे अपनी इंद्रियों का गुलाम बनाता है, जिससे वह पशुओं की हत्या करने लगता है।
🌟शाकाहार बेहतर:
उन्होंने फल और सब्जियों जैसे रंगीन, सुगंधित शाकाहारी भोजन को बेहतर बताया, जो मन को शांत करते हैं।
🌟शराब के बारे में ओशो के विचार:
क्षणिक आनंद: शराब क्षणिक सुख देती है और अहंकार को थोड़ी देर के लिए भुला देती है, लेकिन यह क्षणभंगुर है और अंततः दुख देती है।
🌟"शाश्वत" शराब:
ओशो ने "शाश्वत" या "दिव्य" शराब (आध्यात्मिक परमानंद) की बात की, जो अहंकार को हमेशा के लिए मिटा देती है, जबकि भौतिक शराब केवल धोखा है।
🌟🌟निष्कर्ष
जबरदस्ती त्याग व्यर्थ है: ओशो कहते थे कि यदि आप सिर्फ इसलिए मांस या शराब छोड़ते हैं क्योंकि कोई कहता है, तो उसका कोई आध्यात्मिक मूल्य नहीं है। त्याग अंतर्मन से आना चाहिए, जबरदस्ती नहीं।
🌟🌟स्वतंत्रता और प्रेम: उनका पूरा दृष्टिकोण मानवीय था, जिसमें व्यक्ति को स्वतंत्रता और प्रेम के साथ जीना था। वह लोगों को दुखी या गंभीर संत बनने के बजाय स्वतंत्र, प्रेमपूर्ण और ध्यानमग्न जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करते थे।
🌟🌟आध्यात्मिक मार्ग: आध्यात्मिक पथ पर व्यक्ति को स्वयं यह अनुभव करना होता है कि मांस और शराब उसके लिए सही नहीं हैं, क्योंकि वे उसे ऊपर उठाने के बजाय नीचे गिराते हैं।
Disclaimer :
The voice used in this video is AI-generated and inspired by the style of Osho’s voice. It is not Osho’s original recording. All the words spoken here are fully our own writing and creative interpretation, made as a respectful tribute to Osho’s teachings and philosophy, purpose for education.
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