ओह! तो कैलाशा मंदिर का निर्माण इस तरह से हुआ था? एलियन टेक्नोलॉजी?
Автор: Praveen Mohan Hindi
Загружено: 2021-06-04
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Описание:
आसमान से भी दिखने वाला एक मात्र मंदिर - 'कैलाशा मंदिर'! 😱😱😱
क्या यह एक बहुत उन्नत सभ्यता द्वारा बनाया गया था?😯🤔
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00:00 - परिचय
01:04 - 100 फीट लम्बा स्तम्भ!
02:22 - निर्माण कार्य में कितना समय लगा?
03:56 - औरंगज़ेब द्वारा मंदिर को नष्ट करने का आदेश|
04:49 - इजिप्ट का पिरामिड!
05:26 - इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट निपुणता के साथ बना मंदिर!
06:21 - आसमान से भी दिखने वाला एक मात्र मंदिर!
07:19 - अद्भुत कारीगरी!
08:39 - निष्कर्ष
नमस्कार दोस्तों! यह विश्ि प्रसिद्ध एलोरा स्थीत कै लि मंददर है! चसलए इि ननष्पक्ष होके देखते है कक इि अटभूत िंरचना को ककिने बनाया होगा! विडीओ के अंत होने तक मुझे आशा हैआप मुझिे िहमत होंग की हमारा इनतहाि पूरीतरह िे ग़लत है। बल्कक यह मंददर ककिी बहुत ही उन्नत िभ्यता ने बनाया है। इि मंददर के बारे में ऐिी क्या खाि बात है?
यह मंददर पत्थरों के खंडो को जोड़कर बनाया नहीं गया था हालााँकक इिे बनाने के सलए एक पूरे पहाड़ उके री गई। यह विश्ि का एकमात्र मंददर है ल्जिे ऊपर िे नीचे की ओर तक उके र कर बनाया गया है। एलोरा में भी पूरे विश्ि की तरह पहाड़ को िामने की ओर िे भीतर की ओर उके र कर मंददरों को बनाया जाता है। िारी दनुनयााँमें एक ही पत्थर उके रने की तकनीक (कट-इन-मॉनसलथ) का ताररक अपनाया जाता है।
जबकक कै लि मंददर एकमात्र ऐिा मंददर है ल्जिमें इिके विपरीत तकनीक (कट-आउटमॉनसलथ) का इस्तेमाल हुआ। यह जानने के सलए यह तकनीक इतनी सभन्न क्यों है, आइए इि स्तंभ पे एक नज़र डालते है, जो १०० फीट िे भी ऊाँ चा है। ध्यान िे देखखए इंिान ककतने छोटे लग रहे हैइिके िामने। आमतौर पर इतने बड़े ितंभ को िटीक तरीके िे तराशने में बरिों लग जाता है।
परंतुइि ितंभ को एक पहाड़ी के चारों ओर के पत्थरों को ननकाल कर बनाया गया है। आप अंदाज़ा लगाइए इि इतंभ को बनाते िमय ककतनी मात्रा में पत्थर ननकाले गये होंगे।
इनतहािकार और पुरातत्ििेत्ता इििे ननकाले गये पत्थरों की मात्रा िे अचंसभत है। जो कक ४ लाख टन िे भी ज़्यादा मात्रा में पत्थरों को इिकी रचना के दौरान ननकाला गया
होगा | ल्जिमें बरिों नहीं बल्कक िददयों का पररश्रम लगा होगा। इनतहािकारों के पाि ऐिा कोई असभलेख नहीं हैजो ऐिा विशालकाय िंरचना के बन्ने की
पुल्ष्ट करता हो। जबकक उनका मना हैकी यह मंददर १८ िे भी कम बरिों में बना है।
चसलए एक िरल गखित करके देखते हैक्या पता इनतहािका कहीं िही हो। चलो मान लेते है की कारीगर १८ िे १३ घंटे हर ददन बबना रुके लगातार काम करते रहे
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