🐰🦁 खरगोश की चतुराई || अत्याचारी शेर और भयभीत जंगल( panchatantra ki kahani)
Автор: boretaking
Загружено: 2026-02-03
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: अत्याचारी शेर और भयभीत जंगल
बहुत समय पहले की बात है। भारत के किसी घने और हरे-भरे वन में एक विशाल, बलशाली और अत्यंत क्रूर शेर रहता था। उसकी दहाड़ से पूरा जंगल कांप उठता था। वह स्वयं को जंगल का राजा मानता था, परंतु राजा के गुण उसमें कहीं दिखाई नहीं देते थे।
शेर प्रतिदिन शिकार पर निकलता और अपनी भूख से कहीं अधिक जानवरों को मार डालता। वह एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई-कई निर्दोष पशुओं को एक ही दिन में मौत के घाट उतार देता। कई बार वह मारे हुए जानवरों को खाता तक नहीं था।
धीरे-धीरे जंगल में डर और निराशा का माहौल फैल गया। हिरण, नीलगाय, बंदर, लोमड़ी, हाथी, भालू—सब भयभीत रहने लगे। माताएँ अपने बच्चों को सीने से लगाकर रोतीं और कहतीं,
“यदि यह अत्याचार ऐसे ही चलता रहा तो हमारा जंगल शीघ्र ही उजड़ जाएगा।”
एक दिन सभी जानवर बरगद के विशाल वृक्ष के नीचे एकत्र हुए। वहाँ गहरी चिंता और गंभीर चर्चा हुई। अंत में सबने तय किया कि शेर से सीधे बात करना ही एकमात्र उपाय है।
अगले दिन जानवरों का एक प्रतिनिधि दल साहस जुटाकर शेर के पास पहुँचा। शेर उन्हें देखकर गरजा—
“यहाँ क्यों आए हो? क्या मरने की जल्दी है?”
दल के मुखिया ने विनम्रता से कहा—
“महाराज, आप हमारे राजा हैं। प्रजा के बिना राजा का अस्तित्व नहीं होता। यदि आप यूँ ही शिकार करते रहे तो जंगल सूना हो जाएगा।”
शेर ने कुछ देर सोचा। उसे बात में स्वार्थ की गंध दिखी। अंततः उसने शर्त रखी—
“हर दिन मेरे भोजन के लिए एक जानवर भेजा जाएगा। यदि एक दिन भी चूक हुई, तो मैं पूरे जंगल को उजाड़ दूँगा।”
डरे हुए जानवरों ने विवश होकर यह शर्त मान
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