घुघुते 🤩
Автор: Suraj vlogs ( Uttarakhand)
Загружено: 2026-01-16
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घुघुते – मकर संक्रांति की मीठी परंपरा | उत्तराखंड 🏔️
उत्तराखंड में मकर संक्रांति पर
घुघुते बनाए जाते हैं 🌾
गुड़ और गेहूँ से बनी ये मिठास
सिर्फ स्वाद नहीं, एक भावना है ❤️
लोककथा है कि
ठंड में जब पक्षियों को भोजन नहीं मिलता था,
तब लोगों ने घुघुते बनाकर
कौवों को खिलाना शुरू किया 🐦
आज भी बच्चे गाते हैं —
“काले कौवा काले, घुघुते खाले”
और प्रकृति के साथ
अपनी खुशियाँ बाँटते हैं ✨
घुघुते हमें सिखाते हैं
दान, करुणा और परंपरा का महत्व 🌿
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌞
घुघुते क्या हैं?
घुघुते उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई हैं, जो मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रूप से बनाए जाते हैं। इन्हें गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है और अलग-अलग आकृतियों जैसे पक्षी, माला, तलवार या मानव आकृति के रूप में बनाया जाता है।
घुघुते बनाने की कहानी -:
उत्तराखंड की लोककथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति के समय ठंड बहुत अधिक होती थी और पहाड़ों में पक्षियों को भोजन मिलना कठिन हो जाता था। तब लोगों ने गुड़ और आटे से बनी आकृतियाँ बनाकर कौवों और अन्य पक्षियों को खिलाना शुरू किया।
एक बार पहाड़ों में अकाल पड़ा। लोगों और पक्षियों दोनों को भोजन की कमी होने लगी। तब एक बुजुर्ग महिला ने गुड़-आटे से घुघुते बनाए और बच्चों से कहा कि वे इन्हें कौवों को खिलाएँ। माना जाता है कि इसके बाद प्रकृति ने दया दिखाई और फसल अच्छी हुई। तभी से मकर संक्रांति पर घुघुते बनाकर कौवों को खिलाने की परंपरा शुरू हुई।
घुघुते और कौवों का संबंध-:
मकर संक्रांति के दिन बच्चे सुबह-सुबह घुघुते की माला पहनकर छतों या आँगन में जाते हैं और गाते हैं—
“काले कौवा काले, घुघुते खाले”
यह परंपरा प्रकृति, जीव-जंतुओं और इंसान के बीच संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। कौवे को पूर्वजों का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए घुघुते खिलाना पितरों को अर्पण जैसा माना जाता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है
यह उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है
घुघुते समृद्धि, दान और करुणा का प्रतीक हैं
बच्चों को प्रकृति और परंपरा से जोड़ने का माध्यम हैं
निष्कर्ष-:
घुघुते केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा हैं। यह परंपरा हमें सिखाती है कि उत्सव सिर्फ मनुष्यों तक सीमित नहीं होते, बल्कि प्रकृति और जीवों के साथ बाँटने से ही पूर्ण होते हैं।
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