Jashne Eid Miladun Un Nabi ﷺ Ki Haqeeqat Quran Hadees Ki Roshani Me
Автор: Al Mizan
Загружено: 2025-09-01
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ईद मीलादुन्नबी ﷺ की हकीकत
इस्लाम में सबसे अहम चीज़ है अल्लाह की इबादत और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत का पालन करना।
क़ुरआन में अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“कहो (ऐ नबी), अगर तुम अल्लाह से मोहब्बत करते हो, तो मेरी इताअत करो, अल्लाह तुमसे मोहब्बत करेगा और तुम्हारे गुनाह माफ़ करेगा।”
(सूरह आल-ए-इमरान 3:31)
इससे साफ़ पता चलता है कि रसूलुल्लाह ﷺ से मोहब्बत करने का सही तरीका उनकी सुन्नत और तालीमात पर अमल करना है, न कि अपनी तरफ़ से कोई नया तरीका ईजाद करना।
हदीस में नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“जो हमारे इस दीन में कोई नई चीज़ दाखिल करेगा जो उसमें से नहीं है, वह मुरदूद (रद्द) है।”
(बुख़ारी व मुस्लिम)
यानी दीन में नई ईजाद (बिदअत) क़बूल नहीं।
जश्न-ए-मीलाद का मसला
• नबी ﷺ और सहाबा-ए-किराम ने अपनी ज़िन्दगी में कभी मीलाद का जश्न नहीं मनाया।
• क़ुरआन व हदीस में इसकी कोई दलील नहीं मिलती।
• हाँ, नबी ﷺ की ज़िन्दगी, सीरत, और उनकी सुन्नत को याद करना, सीरत की महफ़िलें करना और उन पर अमल करना बिल्कुल सही और सुन्नत है।
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👉 असली मोहब्बत ये है कि हम नबी ﷺ की तालीमात, उनकी सुन्नत और उनके बताए हुए तरीक़े पर चलें, न कि ऐसा जश्न मनाएँ जिसकी दलील न कुरआन में है और न हदीस में।
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