Geography of Bihar | बिहार का भूगोल | Bihar G.K For 67th BPSC/CDPO | बिहार की स्थिति एवं उच्चावच |
Автор: IAS PSC SOLUTION (EDU Sol)
Загружено: 2021-11-25
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बिहार में अनेक प्रकार की भौतिक विविधताएँ जैसे – पर्वत, पठार और मैदान सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। यद्यपि बिहार का अधिकांश भू-भाग मैदानी क्षेत्र है, किन्तु उत्तर में स्थित शिवालिक पर्वत श्रेणी तथा दक्षिण में संकीर्ण पठारी क्षेत्र विविधता उत्पन्न करते हैं। भौतिक दृष्टि के आधार पर बिहार को 3 भौतिक (प्राकृतिक) प्रदेश में विभाजित किया गया है –
उत्तर का शिवालिक पर्वतीय प्रदेश एवं तराई प्रदेश उत्तर का शिवालिक पर्वतीय प्रदेश
तराई प्रदेश
गंगा का मैदान
दक्षिणी पठारी प्रदेश
उत्तर का शिवालिक पर्वतीय प्रदेश एवं तराई प्रदेश उत्तर का शिवालिक पर्वतीय प्रदेश
शिवालिक श्रेणी (हिमालय पर्वत) का विस्तार बिहार में पश्चिमी चंपारण की उत्तरी सीमा (उत्तरी-पश्चिमी बिहार) तक है। शिवालिक श्रेणी का विस्तार 932 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर है। शिवालिक श्रेणी की औसत ऊँचाई 80-250 मीटर के मध्य है। इस शिवालिक पर्वतीय प्रदेश को मुख्यत: 3 भागों में विभाजित किया गया है –
रामनगर दून की पहाड़ी,
हरहा घाटी (दून की घाटी),
सोमेश्वर श्रेणी
रामनगर दून की पहाड़ी – सोमेश्वर श्रेणी के दक्षिण में स्थित रामनगर दून की पहाड़ी 32 Km लंबी और 8 Kmचौड़ी है। इस श्रेणी का सबसे ऊँचा भाग संतपुर है, जिसकी ऊँचाई 242 meter है।
हरहा घाटी (दून की घाटी) – यह घाटी एक संकीर्ण अनुदैर्घ्य घाटी है, जो रामनगर दून और सोमेश्वर श्रेणी के बीच स्थित है। इस घाटी की लंबाई 21 किलोमीटर तथा क्षेत्रफल 214 वर्ग किलोमीटर है।
सोमेश्वर श्रेणी – बिहार में शिवालिक श्रेणी के तीसरे भाग को सोमेश्वर की पहाड़ी के नाम से जाना जाता है, जो लगभग 784 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल विस्तृत है, जिसका शीर्ष भाग बिहार को नेपाल से विभाजित करता है। त्रिवेणी नहर से भिखना ठोरी दर्रा तक फैली इस श्रेणी की लंबाई 70 Km है। नदियों के तीव्र बहाव के कारण इस श्रेणी में अनेक दरों का निर्माण हुआ है, जिसमें सोमेश्वर दर्रा, भिखना ठोरी दर्रा, मरवात दर्रा आदि प्रमुख हैं। ये दर्रे बिहार और नेपाल के बीच यातायात का मार्ग प्रदान करते हैं। बिहार की सर्वोच्च चोटी पर सोमेश्वर किला स्थित है, सोमेश्वर श्रेणी में है। जिसकी ऊँचाई लगभग 880 meter है।
तराई प्रदेश
गंगा मैदान के उत्तरी भाग एवं शिवालिक श्रेणी के समानांतर दक्षिणी भाग को तराई प्रदेश कहते है। बिहार में तराई प्रदेश का विस्तार उत्तर-पश्चिम तथा उत्तर-पूर्वी सीमा तक है। इस प्रदेश में औसत वर्षा 150–200 cm तक होने के कारण घने वन एवं दलदली क्षेत्र का विकास हुआ है। उत्तरी-पूर्वी तराई प्रदेश पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जिले में फैला हुआ है। यह बिहार का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।
गंगा का मैदान
गंगा के मैदान का कुल क्षेत्रफल 90650 वर्ग किलोमीटर है, जो बिहार के कुल क्षेत्रफल का 96.27 % है। जो उत्तर में शिवालिक श्रेणी से लेकर दक्षिण में छोटानागपुर पठार तक विस्तृत है। गंगा के मैदान की औसत ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 75-120 meter तक है। गंगा के मैदान का निर्धारण 150 meter मीटर की समोच्च रेखा (Contour line) द्वारा किया जाता है। वह रेखा जो समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाकर खींची जाती समोच्च रेखा (Contour line) कहलाती है। गंगा के मैदान का ढाल पश्चिम से पूरब की ओर है। जो अत्यंत मंद ढाल (5-6 cm/km) है। जो पश्चिम में अधिक चौड़ा है, जबकि पूरब की ओर इसकी चौड़ाई कम होती जाती है। बिहार में के मैदान को गंगा नदी द्वारा दो भागों में विभाजित है –
उत्तरी गंगा का मैदान,
दक्षिणी गंगा का मैदान
उत्तरी गंगा का मैदान
उत्तरी गंगा के मैदान का विस्तार पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीवान, गोपालगंज, सीतामढ़ी, मधुबनी, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा और भागलपुर जिलों में है। जिसका कुल क्षेत्रफल 56,980 वर्ग किलोमीटर है। जिसका निर्माण गंगा और उसकी सहायक नदियों — घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, महानंदा आदि के द्वारा एकत्रित किए गए अवसादों से होता है। उत्तरी गंगा के मैदान का ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूरब की ओर है। यह मैदान नदियों द्वारा कई दोआब क्षेत्रों में विभाजित है। जिसमें घाघरा-गंडक दोआब, कोसी-गंडक दोआब, कोसी-महानंदा दोआब प्रमुख हैं। इस मैदान में नदियों द्वारा परित्यक्त एवं विसर्पाकार गोखुर झील एवं चौर का निर्माण हुआ है।क्षेत्रीय भिन्नता के आधार पर उत्तरी गंगा के मैदान को कई भागों में विभाजित किया गया है –
उप-तराई क्षेत्र (भाबर क्षेत्र),
बाँगर,
खादर,
चौर (मन)
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