'राग और ज्ञान जुदा है' ऐसी जानकारी मात्र से आत्मकल्याण नहीं होगा । -आ.डॉ.विवेकजी सागर,दिल्ली ।
Автор: Sanjay Shah,Idar.
Загружено: 2026-02-27
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Описание: जिसकी ज्ञान स्वभाव पर दृष्टि होती है उसे मैं ज्ञाता हूं ऐसी अनुभूति होती है और मैं कर्ता नहीं हूं ऐसा भाव भासन होता है। ऐसा भाव भासन हुए बिना आत्मकल्याण होनेवाला नहीं है। अगर आत्मकल्याण करना है तो गंभीरता से तत्त्व निर्णय करना होगा और शांत होकर चिंतन करना पडेगा ।
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