शुक्रवार और प्रदोष पर ये स्तोत्र से मिलेगा स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति और मन की शांति के आशीर्वाद |
Автор: Sandip Pandya
Загружено: 2026-01-29
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शुक्रवार (माता लक्ष्मी/शुक्र ग्रह) और प्रदोष (भगवान शिव) का संयोग अत्यंत शुभ होता है। इस दिन सिद्धिलक्ष्मी स्तुति से दरिद्रता का नाश, आर्थिक समृद्धि और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, विष्णु-लक्ष्मीकृत शिव ध्यान स्तुति से मानसिक शांति, उत्तम संतान, आरोग्य और शत्रु भय से मुक्ति मिलती है। यह संयोजन मनोकामना पूर्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
शुक्रवार और प्रदोष व्रत (शुक्र प्रदोष) के प्रमुख लाभ:
आर्थिक समृद्धि व दरिद्रता नाश: सिद्धिलक्ष्मी स्तोत्र के पाठ से दरिद्रता का अंत होता है और धन, धान्य, यश व सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
वैवाहिक सुख: शुक्र प्रदोष व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।
शत्रु व रोग से मुक्ति: विष्णु-लक्ष्मीकृत शिव ध्यान स्तुति शत्रुओं को शांत करने, दरिद्रता को मिटाने, महामारी/रोग से रक्षा और सर्व मनोकामनाओं को पूरा करती है।
साकारात्मकता: यह स्तुति मानसिक शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
कष्टों का निवारण: भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से जीवन के क्लेश और पापों का नाश होता है।
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