श्री शिव पुराण कथा 9 दिवस काछी पिपरिया रहली सागर मप्र आचार्य-केशव प्रसाद जी महाराज वृन्दावन
Автор: SHRI JI JYOTISH KRIPA
Загружено: 2026-02-15
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आइए जाने शास्त्रानुसार पशु पक्षियों को पालने से हम पर और हमारे जीवन पर क्या असर होता हैं
{आचार्य-केशव प्रसाद जी ज्योतिर्विद}
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✍🏻भारतीय सनातन संस्कृति में हर पशु हर पक्षी के अंदर विशेष तरह की तरंगे होती है उस तरंग के कारण उसका प्रभाव हमारे ऊपर पड़ता है।
पशु पक्षी के रंग और उनकी आदतों का असर हमारे ऊपर पड़ता है स्वास्थ्य पर भी इसका भारी असर होता है।
और आर्थिक दशा पर भी इसका असर होता है हमारे जीवन पर यह असर कभी-कभी कम और कभी-कभी तो ज्यादा होता है।
हम जितना पशु-पक्षी के निकट रहेंगे उतना ही प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ेगा।
उसका अटैचमेंट आपके जीवन पर गहरा असर डाल देगा यह बात जाने आवश्यक है।
अगर हम कुत्ते की बात करें तो शास्त्रों में कुत्ता अधिकतर लोग पालते हैं कुत्ता सबसे ज्यादा वफादार,बुद्धिमान और दूरदर्शी प्राणी है।
इसे धार्मिक रूप से भैरव की सवारी माना जाता है इसका संबंध ज्योतिष से भी जोड़ा जाता है।
राहु केतु या शनि के साथ कुत्ता पालने से मानसिक डिप्रेशन दूर होता है साथ ही आने वाली दुर्घटना से रक्षा होती है।
काला कुत्ता शनि का प्रतीक है और भूरा कुत्ता राहु का प्रतीक है चितकबरा यानी बहुत सारे रंगों वाला कुत्ता केतु का प्रतीक है।
अगर आपकी कुंडली में केतु खराब है तो कुत्ता नहीं पालना चाहिए आपको समस्या हो सकती है।
शनि खराब है तो कुत्ता पालना चाहिए वह आपके जितना नजदीक होगा आपका बिगड़ा हुआ शनि मजबूत हो जायेगा!
किंतु ध्यान रहे अपना कार्य पूर्ण होने के बाद किसी भी पशु पक्षियों को बंधन में नही रखना चाहिए।
और हर किसी को कुत्ता भी नही पालना चाहिए.....ज्योतिष शास्त्र में शनि,केतु, राहु,ग्रह को छोड़कर अन्य ग्रह के लिए या कुत्ता पालना वर्जित है ।
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