महाशक्ति भारत: गटर की सफाई से अंतरिक्ष की खोज तक (2/2) [Gandhi’s Legacy] | DW Documentary हिन्दी
Автор: DW Documentary हिन्दी
Загружено: 2022-08-12
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[12.08.2022] दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत, आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. अहिंसात्मक सत्याग्रह की खास तकनीक के जरिए महात्मा गांधी ने देश की आजादी का रास्ता खोला था. उन्होंने एक बहुलवादी, धर्मनिरपेक्ष और सभी के लिए समान अवसरों वाले देश के लिए आंदोलन किया था. उनकी इन उम्मीदों की आज के भारत में क्या जगह है? भारत ने खुद को महात्मा गांधी और अन्य राष्ट्रनिर्माताओं के समानता और अहिंसा जैसे आदर्शों से कितना दूर कर लिया है? किस तरह लोकतंत्र, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से देश की दूरी बढ़ती जा रही है और भारत कहां जा रहा है?
यह वे सवाल हैं, जो यह दो भागों वाली डाक्यूमेंट्री "महात्मा गांधी की विरासत" की कहानी का आधार हैं. यह डाक्यूमेंट्री उन लोगों पर केंद्रित है जो आज भी गांधी के आदर्शों को जीवित रखने के लिए काम कर रहे हैं. ऐसा करना एक चुनौती है क्योंकि वर्तमान सच्चाईयां अक्सर उन लक्ष्यों से अलग ही एक दुनिया गढ़ रही हैं. यह कहानियां साथ लाने पर ऐसी रंगोली तैयार होती है जो भारत जैसे अनेकताओं से भरे देश का सटीक चित्रण करती हैं.
भारत बेहद गरीबी और धनी अरबपतियों, दोनों के लिए चर्चा में रहता है. एक ओर यह हिंदू राष्ट्रवाद, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझने के चलते कमजोर पड़ा है. तो दूसरी ओर यह बड़े भूराजनैतिक लक्ष्यों और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है. संविधान में भले ही जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित कर दिया गया हो लेकिन देश में आज भी इसकी आबादी के कुछ हिस्से आज भी हाशिए पर पड़े हुए हैं. शहरी ईंट भट्ठों में आज भी बच्चों का शोषण जारी है. कंपनियों की मदद से विकास लाने के मॉडल के चलते आदिवासियों को उनकी ही जमीन से हटाया जा रहा है. ठीक इसी समय, भारत एक बेहद आध्यात्मिक भूमि की पहचान भी बनाए हुए है, एक देश जिसका सांस्कृतिक इतिहास बेहद शानदार है. एक देश जो हर तरह की समस्याओं के लिए नए, कारगर और रचनात्मक तरीकों के साथ सामने आता है. इस दो भाग की डॉक्यूमेंट्री के दोनों ही हिस्से इन आपस में गुंथी दुनियाओं को खंगालते हैं और व्यक्तिगत कहानियों के जरिए इन्हें पर्दे पर उतारते हैं.
भारत की हालिया स्थिति के वर्णन में अकसर अतीत का जिक्र आता है, जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखी गई थी. महात्मा गांधी, जिनकी 1948 में हत्या कर दी गई थी, उनके पोते अरुण गांधी, डॉक्यूमेंट्री में उस अतीत और वर्तमान के बीच पुल बांधने वाले खास शख्स हैं. अरुण अपने दादा के साथ कई सालों तक रहे हैं और उस समय के अपने व्यक्तिगत किस्सों की बानगी देते हैं. उन्होंने अपने दादा के विचारों को एक काफी पसंद की जाने वाली किताब ‘द गिफ्ट ऑफ एंगर: एंड अदर लेसन्स फ्रॉम माई ग्रैंडफादर महात्मा गांधी’ में दर्ज किया है. वह भारत के आधुनिक इतिहास और इसकी वर्तमान स्थिति की तुलना भी करते हैं.
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