तुम
Автор: Bishwas Pandey
Загружено: 2026-01-25
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Lyrics & Composition: Jagadguruttam Shri Kripalu Ji Maharaj
Book 📖: Braj Ras Madhuri (Part 1, Pg. 43)
Recorded in Sadhana Bhawan, Mangarh,1992.
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तुम मेरे थे मेरे हो मेरे रहोगे, बहकूँ न अब बहकाने से |
जब समझ प्रेम में डूब गई, तब क्या होगा समझाने से |
तुम को ही तन मन धन अरपन, तुम ही इक मेरे जीवन धन,
अब पीछे नहीं हटेगा पग, पिय ! विरह चोट उर खाने से |
दे दो ऐसी विरह वेदना, मिटि जाये मम अहं चेतना,
और अधिक चमकेगा सोना, पुनि पुनि अगिनि तपाने से |
आ या ना आ मुरली वारे, रो रो कर हम तुम्हें पुकारें,
प्रेम बढ़ेगा छिन छिन मेरा, यूँ तेरे तड़पाने से |
पिय ! तुम से ही प्रीति लगाई, पर झोली भी संग नहिँ लाई,
इक बार लगा लो सीने से, बलिहार जाउँ अपनाने से |
चाहे मम आलिंगन कर लो, चाहे मम प्रानन ही हर लो,
चाहे जी भर कर तड़पा लो, मोहिँ काम श्याम गुन गाने से |
इक दिन प्रेम रंग लायेगा, पिय ! तुम को भी तडपायेगा,
मैं हूँ सखी किशोरी जू की, नाता मम बरसाने से |
तुम हार मान लो बनवारी, बदनाम न हो जाये यारी,
हारोगे, हारे हो सब दिन, पछिताओगे इतराने से |
तू ही तो सब कुछ मेरा है, यह कहा हुआ भी तेरा है,
जग में भी बढ़ता प्यार सदा, पिय के घर आने जाने से |
लख चौरासी स्वाँग बनाये, नट ज्यों बहु विधि खेल दिखाये,
अब तो अपने पास बुला लो, रीझोगे न रिझाने से |
क्यों चुप हो पिय ! कुछ तो बोलो, भंडार कृपा का अब खोलो,
हो जाय न कहुँ अंधेर देर महँ, इतनी देर लगाने से |
चुप का मतलब अब समझ लिया, आखिर पिय ने अपना ही लिया,
आशा तो पहले से ही थी, बिनु हेतु 'कृपालु' कहाने से ||
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~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~
~~Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj~~
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