Rewa fort / रीवा राजघराने /rewa kila / Rewa Museum /प्रतापी महाराजा गुलाब सिंह/ Rewa ka kila
Автор: Piyush Kashyap
Загружено: 2022-01-06
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रीवा के बघेल साम्राज्य किले का इतिहास ४०० वर्ष पुराना है. यहां महाराजा व्याग्रदेव से लेकर वर्तमान महाराजा पुष्पराज सिंह तक ३५ पीढ़ियों का शासन रहा है.
रीवा। मध्यप्रदेश का रीवा राजघराना अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता रहा है। यहां एक ऐसी परंपरा है जो शदियों से चली आ रही जिसमें राजाओं की जगह गद्दी पर भगवान राम को विराजा जाता है। रीवा में बाघेल वंश के राजाओं ने 35 पुस्त तक शासन किया। यहां के राजा भगवान राम के अनुज लक्ष्मण को अपना अग्रज मानते रहे हैं। उनके कुल देवता लक्ष्मण माने जाते हैं। इस कारण यहां के राजा लक्ष्मण के नाम पर ही शासन करते रहे हैं।
महाराजा रघुराज सिंह ने लक्ष्मणबाग संस्थान की स्थापना की और वहां पर लक्ष्मणमंदिर बनवाया। देश के कुछ चिन्हित ही ऐसे स्थान हैं जहांपर लक्ष्मण के मंदिर हैं उनकी पूजा होती है।गद्दी का निकलता है चल समारोहरीवा किले से अभी भी राजाधिराजकी गद्दी का पूजन किया जाता है और दशहरे के दिन चल समारोह निकलता है। गद्दी का दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आतेहैं। राजघराने के प्रमुख पुष्पराज सिंह, उनके पुत्र दिव्यराज सिंह एवं बाघेल खानदान के लोग पहले गद्दी का पूजन करते हैं और बाद में पूरे शहर में चल समारोह निकलता है। शदियों की परंपरा अभी भी यहां जीवित है।
राजाधिराज ने हर समय संकट से बचायापुजारी महासभा के अध्यक्ष अशोक पाण्डेय कहते हैं कि राजाधिराज को गद्दी में बैठाने का यह फायदा रहा कि रीवा राज विपरीत परिस्थतियों से हर बार उबरता रहा। कई बार संकट की स्थितियां पैदा हुई लेकिन उनका सहजता से निराकरण हो गया। यहां की पूजा पद्धतियां भी अन्य राज्यों से अलग पहचान देती रही हैं।शेरोँ का शहर रीवा: जो कभी गुलाम नही बनाआज हम बात कर रहे हैँ एक ऐसे शहरकी जिसने पूरे विश्व को सफेद शेरोँ का नायाब तोहफा दिया है।रीवा के घने जंगलोँ मेँ सबसे पहले सफेद शेर देखे गये थे। महाराजा गुलाब सिंह ने वैज्ञानिकोँ की सहायता से सफेद शेरोँ की किस्म विकसित कराया। आज विश्व के बडे बडे चिडियाघरोँ मेँ सफेद शेर रीवा रियासत की ही देन है। पहले सफेद शेर मोहन का अस्थि पंजर आज भी रीवा के म्यूजियम मेँ संग्रहीत है।
रीवा के बारे मेँ एक बात यह भी है कि जब पूरे भारत मेँ अंग्रजोँ की हुकूमत थी तब भी रीवा रियासत स्वतंत्र थी।रीवा का इतिहास बहुत पुराना है। रीवा एक ऐसा ही राज्य था जहाँ हर एक इंसान शेर और आजादी उनकी शान थी।ऐसी भी मान्यतामाना जाता है की रीवा मेँ बडे प्रतापी राजा हुये।
Rewa history in hindi
महाराजा रघुराज सिँह के बारे मेँ सुना है कि एक बार युद्ध के समय सोन नदी मेँ बाढ थी तो उन्होने सोन नदी से उस पार जाने के लिये रास्ता माँगा। सोन नदी ने उनकोरास्ता दे दिया था। इसी प्रकारएक बार अंग्रजोँ ने उन्हे आमंत्रित किया था। उनके अस्त्र शस्त्र बाहर रखा लिये गये थे। उन पर संधि के लिय दबाव डाला गया तो उन्होने अपनी पेन से एक फायर किया तो एक बडी सी चट्टान के दो टुकडे हो गये। अंग्रेज भी भयभीत हो गये थे कि जहाँ के पेन मेँ ऐसी शक्ति है वहाँ की तोपोँ मेँ भला कैसी शक्ति होगी। महाराजा रघुराज सिँह की मृत्यु के बारे मेँ मैने एक आश्चर्य जनक घटना सुनीहै। कहते हैँ मृत्यु के समय वो बहुत बीमार पड गये थे । एक साधू किला के बाहर भिक्षा माँगने आया। उसने अपने कमंडल मेँ घी माँगा। उसके कमंडल मेँ घी डाला गया परंतु वो कमंडल भरने का नाम नही ले रहा था। महाराजा रघुराज सिँह को जब इस बारे मेँ बताया गया तो उन्होने कमंडल के ही आकार का दूसरा कमंडल बनाने का आदेश दिया। उसके बाद महाराज ने अपने कमंडल को घी से भरा। महाराज ने अपने कमंडल से घी साधू के कमंडल मेँ डालना शुरु किया। कहते हैँ कि न तो साधू का कमंडल भर रहा था और न ही महाराज का कमंडल खाली हो रहा था। अंततः साधू का कमंडल भर गया। साधू ने कहा तुम धन्य हो पर अब तुम्हारे धरती से चलना का समय आ गया है। उसी रात महाराज का स्वर्गवास हो गया। ऐसे ही प्रतापी महाराजा गुलाब सिंह जू राव और महाराजा मार्तण्ड सिँह थे।
इलाहाबाद मेँ जमुना किनारे के अंग्रजोँ के किले कीजेल की मोटी सलाख को महाराज मार्तण्ड सिँह ने अपने तंबाखू रखने वाले पात्र से काट दिया था।था।रीवा रियासत मेँ चेतक के समान ही एक घोडा था जो युद्ध के समय अपने मुख के जबडोँ मेँ तलवार को फँसाकर दुश्मनोँ की सेना कोगाजर मूली की तरह काट डालता था। इस घोडे के मृत्यु के बाद राजकीय विधि से इनका अंतिम संस्कार किया गया और और उसके सम्मान मेँ एक पार्क बनाया गया।अकबर के नवरत्नो मेँ शामिल प्रसिद्ध बुद्धिमान बीरबल और संगीतकार तानसेन रीवा रियासत की ही देन ह
ये भी हमारे रीवा के ही देन है।रीवा राज्य की प्रसिद्धियों को इतिहास में जगह नहीं दी गई, माना जाता है की अंग्रेजो के चाटुकारिता न करने का यह परिणाम है की रीवा राज्य के राजघरानो को रीवा तक ही सिमित रखा गया...आज भी इतिहास के पन्नो में मात्र रीवा का नाम शफेद शेर के कारण ही आता है, जबकि रीवा राज्य ने कई रत्न देश को दिए....शाहरुख खान और करीना कपूर अभिनीत फिल्म 'अशोक' मेँ शहरुख खान के हाँथ मेँ जो तलवार थी वो रीवा राजघराने की ही थी।
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