वांकी जैन तीर्थ (कच्छ) का इतिहास
Автор: Jain Story9
Загружено: 2021-02-10
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जैनाचार्य श्री कलापूर्ण सूरीश्वरजी महाराज साहेब की प्रेरणा से कलाई घड़ी के बेल्ट की फैक्ट्री के बजाय, वांकी मे बना एक शानदार जिनालय।
कच्छ में, भद्रेश्वर जैन तीर्थ से 26 किलोमीटर दूर वांकी नामक एक छोटा सा गाँव है। इस गाँव में, 128 वर्ष प्राचीन श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का देरासर है।
यहा 34 साल पहले आठ एकड़ भूमि पर एक भव्य जैन मंदिर का निर्माण हुआ इसके साथ ज्ञान मंदिर, साधु साध्वीजीओं का उपाश्रय, 56 रूम की बड़ी धर्मशाला एवं भोजनशाला भी बनाया गया। 1989 में इस जैन देरासर की प्रतिष्ठा हुई। फिर दस वर्षों बाद यानी वर्ष 1999 में 110 साधु भगवंतों के साथ परम पूज्य श्री कलापूर्ण सूरीश्वरजी महाराज साहेब का वांकी तीर्थ में चातुर्मास हुआ था। उस समय चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन हजारों लोग यहां आते-जाते थे। मानसून के दौरान, धर्म, ध्यान और भक्ति का रंग छा गया था। इस दौरान वांकी जैन तीर्थ पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गया।
वांकी का यह जैन मंदिर देलवाड़ा, रानकपुर और तारंगा के जीनालयों की याद दिलाता है, यह देश का पहला जैन मंदिर है, जिसमें मुख्य मंदिर के चारों ओर कुल 42 पट्ट बनाए गए हैं। इसमें महावीर स्वामी भगवान, गौतम स्वामी, साधु साध्वियों और श्रावक श्राविकाओं के जीवन की प्रेरक घटनाओं का इतिहास दर्शाया गया है।
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