असुर निकंदनरमैनी
Автор: Karishma guru ji ki
Загружено: 2026-02-19
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गरीब, संख कल्प जुग जीवना, तत्त न दरस्या रिंच। आन उपासा करते हैं, ज्ञान ध्यान परपंच।।
यदि कोई संख कल्प तक जीवित रहे। ज्ञान जरा-सा भी नहीं है। तत्त्वज्ञानहीन है। सत्य भक्ति से वंचित है तो वह लंबा जीवन भी व्यर्थ है।(एक कल्प में एक हजारआठ चतुर्युग होते हैं... यानि ब्रह्मा का एक दिन)
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