वासना और अहंकार से मुक्ति कैसे मिले? | मोक्ष का अंतिम रहस्य | विवेकचूड़ामणि भाग–5 | आदि शंकराचार्य
Автор: The Spiritual Talk
Загружено: 2026-02-06
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इस वीडियो में हम आदि शंकराचार्य कृत विवेकचूड़ामणि के पाँचवें भाग का गूढ़ और व्यावहारिक अर्थ समझते हैं।
गुरुदेव इस भाग में बताते हैं कि आत्मज्ञान प्राप्त हो जाने के बाद भी यदि वासनाएँ और अहंकार शेष रह जाएँ, तो मनुष्य पुनः जन्म-मरण के संसार चक्र में फँसा रहता है।
इस भाग में आप जानेंगे —
🔹 वासना और अहंकार ही संसार बंधन का मूल कारण क्यों हैं
🔹 विषय-चिंतन और बाह्य प्रवृत्ति कैसे आत्मा को ब्रह्म से दूर ले जाती है
🔹 ब्रह्म-वासना से अहंकार का नाश कैसे होता है
🔹 समाधि और आत्मनिष्ठा ही मोक्ष का अंतिम उपाय क्यों है
🔹 “मैं कर्ता हूँ, मैं भोक्ता हूँ” — इस भ्रांति से मुक्ति कैसे मिले
यह भाग साधक को अंतर्मुखी साधना, वैराग्य और अखंड ब्रह्मभाव की ओर ले जाता है।
यदि आप अद्वैत वेदांत, आत्मज्ञान और मोक्ष मार्ग को गंभीरता से समझना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।
📿 श्रवण करें, मनन करें और आत्मचिंतन में उतरें। #adishankaracharya #advaitavedanta #brahmagyan #vedanta #selfrealization #nonduality #spiritualawakening #vedanticwisdom #आत्मबोध #ahambrahmasmi #Vivekchudamani
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