OSHO ll आंखों का फड़कना: अंधविश्वास या भीतर का संदेश? lI Osho Vichar
Автор: Meditation with NK
Загружено: 2026-02-04
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आंखों का फड़कना: अंधविश्वास या भीतर का संदेश? |
आंखों का फड़कना अक्सर लोग शुभ-अशुभ से जोड़ देते हैं।
कोई कहता है बाईं आंख फड़के तो बुरा, दाईं फड़के तो अच्छा।
लेकिन ओशो कहते हैं — सत्य बाहर नहीं, भीतर है।
इस वीडियो में हम आंखों के फड़कने को अंधविश्वास की नजर से नहीं,
बल्कि जागरूकता, ध्यान और भीतर के संकेत की दृष्टि से समझते हैं।
आंखें केवल देखने का साधन नहीं हैं,
वे मन की स्थिति को प्रकट करती हैं।
जब भीतर तनाव होता है, दबा हुआ डर होता है,
या मन वर्तमान से भटक जाता है —
तब शरीर संकेत देने लगता है।
यह वीडियो उन लोगों के लिए है
जो जीवन को गहराई से समझना चाहते हैं,
जो ओशो के विचारों में शांति खोजते हैं,
और जो अंधविश्वास से ऊपर उठकर
स्वयं को जानना चाहते हैं।
👉 इस वीडियो को ध्यान से सुनिए,
यह भविष्य नहीं बताएगा,
लेकिन आपको अभी में लौटना जरूर सिखाएगा।
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