Shri Vishnu Sahastra Naam Stotra | श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र
Автор: Life Solutions
Загружено: 2026-02-28
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श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्रों में से एक है। यह महाभारत के 'अनुशासन पर्व' से लिया गया है। जब पितामह भीष्म कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद शरशय्या (बाणों की शय्या) पर लेटे हुए थे, तब युधिष्ठिर के पूछने पर उन्होंने भगवान विष्णु के इन 1000 नामों का उपदेश दिया था।
यहाँ इसका विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. पृष्ठभूमि और महत्व
युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा था कि "इस संसार में परम शरण क्या है? और किसका नाम जपने से मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है?" इसके उत्तर में भीष्म ने श्री विष्णु सहस्रनाम का उपदेश दिया।
2. मुख्य संरचना
1000 नाम: इसमें भगवान विष्णु के एक हजार नामों का वर्णन है। प्रत्येक नाम उनकी किसी न किसी महिमा, गुण या शक्ति को दर्शाता है।
महिमा: इसका पाठ करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
सर्वव्यापकता: विष्णु का अर्थ ही है "वह जो सब जगह व्याप्त है"।
3. स्तोत्र के लाभ (फलश्रुति)
शास्त्रों के अनुसार, इसका नियमित पाठ करने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
भय का नाश: यह हर प्रकार के डर (मृत्यु, रोग, दरिद्रता) को दूर करता है।
पापों से मुक्ति: अनजाने में किए गए पापों का क्षय होता है।
मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से पाठ करने पर व्यक्ति की धर्मसंगत इच्छाएं पूरी होती हैं।
सकारात्मक ऊर्जा: घर और मन में नकारात्मकता का नाश होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
4. प्रसिद्ध पंक्तियाँ
इस स्तोत्र की शुरुआत में ही भगवान विष्णु के स्वरूप का सुंदर वर्णन है:
"शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं..."
(अर्थ: शांत आकृति वाले, शेषनाग की शय्या पर लेटे हुए, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के स्वामी हैं।)
5. विशेष रोचक तथ्य
आदि शंकराचार्य ने इस पर सबसे पहला भाष्य (Commentary) लिखा था।
कहा जाता है कि यदि कोई पूरा सहस्रनाम नहीं पढ़ सकता, तो भगवान शिव के अनुसार केवल 'राम' नाम का जाप भी इसके समान फल देता है:
"श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥"
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