माघ गुप्त नवरात्रि के दुसरे दिन महाविद्या मां तारा कथा पूजा विधी प्रिय भोग रंग फूल मंत्र आरतीMaaTara
Автор: Shivkrishna bhakti
Загружено: 2026-01-19
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Navratri Katha- गुप्त नवरात्रि की कथा, गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन - मां तारा की कथा | Gupt Navratri ki Katha | Mahavidya Tara ki Katha
नमस्कार दोस्तों आज 20 जनवरी 2026 माघ गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन में आप सभी के समझ मां तारा देवी की कथा प्रस्तुत कर रही हूं। गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती है पहली गुप्त नवरात्रि माघ मास में पढ़ती है और दूसरी आषाढ़ मास में पढ़ती है। दोनों ही गुप्त नवरात्रि में दूसरे दिन मां तारा की पूजा अर्चना की जाती है।
मां तारा देवी के अवतार की कहानी समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी हुई है। एक समय अमृत की प्राप्ति के लिए देवताओं और दैत्यों ने समुद्र मंथन किया था। जब समुद्र मंथन आरंभ हुआ तो सबसे पहले समुद्र से हलाहल विष निकला। उस विष की ज्वाला से सभी देवता तथा देती है जलने लगे और उनकी कांति फीकी पड़ने लगी। इस पर सभी ने मिलकर भगवान शंकर की आराधना शुरू कर दी। उनकी प्रार्थना पर महादेव ने उस विष को हथेली पर रखकर उसे पी लिया। किंतु उसे कंठ से नीचे नहीं उतरने दिया। उस कालकूट विष के प्रभाव से शिवजी का कंठ नीला पड़ गया। इसीलिए महादेव जी को नीलकंठ कहते हैं। इस तरह भगवान शिव ने दुनिया को विनाश से बचा लिया। लेकिन विश्व के शक्तिशाली प्रभाव से महादेव जी के गले में जलने से होने वाली पीड़ा रुकने का नाम नहीं ले रही थी। तब देवी भगवती मां तारा के रूप में प्रकट हुई और भगवान शिव जी ने शिशु का रूप लिया। देवी भगवती मां तारा के रूप में शिव को अपनी गोद में ले लिया और भगवान शिव को अपना अमृतमय दुग्ध स्तन पान कराया। फल स्वरुप भगवान शिव को पीड़ा से मुक्ति मुक्ति मिल गई। लेकिन मां तारा देवी के शरीर पर हलाल का असर हुआ जिसके कारण वह नीले वर्ण की हो गई। तारा मां जगत जननी माता के रूप में तथा गौर से गौर संकटों की मुक्ति हेतु प्रसिद्ध हुई। जिस
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