We Bangali Celebrate | Bhoot Chaturdashi | भूत चतुर्दशी 2025 | जय माँ काली
Автор: Piyush Saha
Загружено: 2025-10-19
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Bhoot Chaturdashi 2025: भूत चतुर्दशी बंगाल में मनाया जाने वाला एक खास त्योहार है. यह पर्व काली पूजा, यानी दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शाम के समय माता काली भगवान यमराज, भगवान शिव और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है, वहीं रात के समय माता चामुंडा की आराधना की जाती है. चलिए समझते हैं, इस पर्व के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से.
Bhoot Chaturdashi 2025:भारत एक विविधताओं वाला देश है. यहां हर राज्य में आपको अलग-अलग रीति-रिवाज, परंपराएं, त्योहार और संस्कृतियां देखने को मिलेंगी. ऐसा ही एक अनोखा और खास त्योहार है भूत चतुर्दशी का. इस पर्व को पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में दिवाली के एक दिन पहले, यानी छोटी दिवाली के दिन मनाया जाता है. इस पर्व को कई जगह नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है.
भूत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
माना जाता है कि भूत चतुर्दशी की पूजा करने से बुरी शक्तियां और नकारात्मक आत्माएं घर से दूर रहती हैं. साथ ही, इससे पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है. कहा जाता है कि इस दिन बुरी शक्तियां और आत्माएं अत्यंत सक्रिय रहती हैं. इसलिए इस दिन घरों में माता काली की पूजा करने से ये नकारात्मक शक्तियां घर के वातावरण में प्रवेश नहीं कर पातीं.
भूत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मृत 14 पूर्वज धरती पर अपने परिजनों से मिलने आते हैं. इसी कारण इस दिन घरों में 14 दीपक जलाने की विशेष परंपरा है. कहा जाता है कि ये दीपक पूर्वजों को घर का रास्ता दिखाने में मदद करते हैं. इन दीपों को घर के हर कोने में रखा जाता है, जो पूर्वजों के सम्मान और स्वागत का प्रतीक माना जाता है. माना जाता है कि पूर्वज इस दिन अपने परिवार को खुश देखकर तृप्त होते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं. साथ ही, यह भी विश्वास किया जाता है कि इससे घर से बुरी शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
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