मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - ४४ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी
Автор: Shree Chaitanya Ram
Загружено: 2026-01-31
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मना रे जनीं मौन्य मुद्रा धरावी।
कथा आदरे राघवाची करावी॥
नसें राम ते धाम सोडोनी द्यावे।
सुखालागिं आरण्य सेवीत जावे॥४४॥
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