ycliper

Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
Скачать

#विप्र

vipr Pujan

VIPRA PUJAN

Brahman Pujan

Brahman Pujan Mantra

विप्र पूजन

ब्राह्मण पूजन

विप्र पूजन मंत्र

ब्राह्मण पूजन मंत्र

रामानुज तिवारी

रामानुज तिवारी सारण

रामानुज तिवारी छपरा सारण बिहार

रामानुज तिवारी छपरा

रामानुज तिवारी श्री रत्नाकर

रामानुज तिवारी सरिया रत्नाकर

सरिया रत्नाकर

तरैया सारण

विप्र प्रसाधन धरणीधर ओहम

विप्र प्रसारित कमला

Автор: Eklavya Guru vaidik Brahman(वैदिक ब्राह्मण)RTiwari

Загружено: 2022-12-03

Просмотров: 20403

Описание: विप्र प्रसादात् धरणी धरोहम्। विप्र प्रसादात कमला वरोहम्।
विप्र प्रसादात् जिताजितोहम्। विप्र प्रसादात् मम नाम रामम्।।

#RamanujTiwari#
#ECC BHELDI#
#EKLAVYAGURU#
अर्थात

ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मैंने धरती को धारण कर रखा है अन्यथा इतना भार कोई अन्य पुरुष कैसे उठा सकता है, इन्ही के आशीर्वाद से नारायण हो कर मैंने लक्ष्मी को वरदान में प्राप्त किया है, इन्ही के आशीर्वाद से मैं हर युद्ध भी जीत गया और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मेरा नाम "राम" अमर हुआ है, अतः ब्राह्मण सर्व पूज्यनीय है । और ब्राह्मणों का अपमान ही कलियुग में पाप की वृद्धि का मुख्य कारण है ।


प्रिय साथियों अब हम कुछ श्लोक और उसके अर्थ के बारे में जानते हैं


चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः ||

अर्थात् : संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |

———

श्लोक 7 :

अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् |

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् |

अर्थात् : यह मेरा है ,यह उसका है ; ऐसी सोच संकुचित चित्त वोले व्यक्तियों की होती है;इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है |

———

श्लोक 8 :

अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् |

परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ||

अर्थात् : महर्षि वेदव्यास जी ने अठारह पुराणों में दो विशिष्ट बातें कही हैं | पहली –परोपकार करना पुण्य होता है और दूसरी — पाप का अर्थ होता है दूसरों को दुःख देना |

———

श्लोक 9 :

श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन ,

दानेन पाणिर्न तु कंकणेन ,

विभाति कायः करुणापराणां ,

परोपकारैर्न तु चन्दनेन ||

अर्थात् :कानों की शोभा कुण्डलों से नहीं अपितु ज्ञान की बातें सुनने से होती है | हाथ दान करने से सुशोभित होते हैं न कि कंकणों से | दयालु / सज्जन व्यक्तियों का शरीर चन्दन से नहीं बल्कि दूसरों का हित करने से शोभा पाता है |

———



श्लोक 10 :

पुस्तकस्था तु या विद्या ,परहस्तगतं च धनम् |

कार्यकाले समुत्तपन्ने न सा विद्या न तद् धनम् ||

अर्थात् : पुस्तक में रखी विद्या तथा दूसरे के हाथ में गया धन—ये दोनों ही ज़रूरत के समय हमारे किसी भी काम नहीं आया करते |

———

श्लोक 11 :



विद्या मित्रं प्रवासेषु ,भार्या मित्रं गृहेषु च |

व्याधितस्यौषधं मित्रं , धर्मो मित्रं मृतस्य च ||

अर्थात् : ज्ञान यात्रा में ,पत्नी घर में, औषध रोगी का तथा धर्म मृतक का ( सबसे बड़ा ) मित्र होता है |




प्रिय मित्र गण इसी तरह के धार्मिक और शिक्षा संबंधी वीडियो प्राप्त करने के लिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें धन्यवाद 👃🌹🌹🌷

Не удается загрузить Youtube-плеер. Проверьте блокировку Youtube в вашей сети.
Повторяем попытку...
#विप्र

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио

Похожие видео

© 2025 ycliper. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]