A# Tanpura scale with Tabla 16 Matra teen Taal रोज़ अभ्यास करें।सरगम और अलंकार के लिए अत्यंय upyogi
Автор: Music School Sangeet Amrit
Загружено: 2026-02-04
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A# स्केल में तानपुरा व तबला (तीनताल) अभ्यास
भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर शुद्धता, लयबोध और स्थिरता के लिए तानपुरा एवं तबला के साथ अभ्यास अत्यंत आवश्यक माना गया है। जब हम A# स्केल में तानपुरा के साथ तीनताल में अभ्यास करते हैं, तो यह न केवल स्वर की पकड़ मजबूत करता है बल्कि ताल और समय की समझ भी विकसित करता है। A# स्केल मध्यम ऊँचाई का स्केल है, जो पुरुष एवं स्त्री दोनों गायकों के लिए उपयोगी होता है।
A# स्केल का महत्व
A# स्केल (जिसे कभी-कभी B♭ भी कहा जाता है) में अभ्यास करने से—
गले की मध्यम ऊँचाई में खुलावट आती है
स्वर न बहुत नीचे जाते हैं, न बहुत ऊँचे
आवाज़ में स्थिरता और मिठास आती है
रियाज़ के लिए सुरक्षित और संतुलित स्केल माना जाता है
इसी कारण कई गुरुजन A#, A या B स्केल में नियमित अभ्यास की सलाह देते हैं।
तानपुरा सेटिंग (A# Scale)
A# स्केल में तानपुरा लगाने की सामान्य पद्धति:
सा – सा – प – सा
या
सा – प – सा – सा
डिजिटल तानपुरा या ऐप में स्केल A# (A Sharp) चुनें।
तानपुरा की ध्वनि को बहुत तेज़ न रखें, बस इतनी हो कि स्वर को सहारा मिले।
तीनताल का परिचय
तीनताल भारतीय संगीत की सबसे प्रचलित ताल है।
मात्रा: 16
विभाग: 4 + 4 + 4 + 4
ठेका:
धा धिन धा धिन | धा धिन धा धिन | धा तिन ता तिन | ता धिन धा धिन
तीनताल में अभ्यास करने से लय की गणना, सम पहचान और खंड-विभाग की समझ स्पष्ट होती है।
अभ्यास से पहले तैयारी
अभ्यास शुरू करने से पहले—
शांत वातावरण चुनें
गले को हल्का खोलने के लिए 2–3 मिनट लंबी साँस लें
तानपुरा सुनते हुए मन को “सा” पर टिकाएँ
तबला तीनताल मध्यम लय में रखें
1. स्वर साधना (A# Scale)
तीनताल में सबसे पहले सरल स्वर अभ्यास करें।
आरोह – अवरोह (तीनताल में):
आरोह:
सा रे ग म प ध नि सां
अवरोह:
सां नि ध प म ग रे सा
हर स्वर को एक-एक मात्रा दें।
सम पर “सा” स्पष्ट और स्थिर होना चाहिए।
👉 इससे ताल और स्वर का संतुलन बनता है।
2. स्थायी स्वर अभ्यास
तीनताल में लंबे स्वर पकड़ने का अभ्यास करें:
सा –––– | सा –––– | प –––– | सा ––––
म –––– | प –––– | ध –––– | सां ––––
इस अभ्यास से—
आवाज़ में ठहराव आता है
साँस की क्षमता बढ़ती है
तानपुरा के साथ सुर बैठता है
3. सरगम अभ्यास (तीनताल)
अब सरगम को तीनताल में बाँधें।
उदाहरण:
धा धिन धा धिन
धा धिन धा धिन
धा तिन ता तिन
ता धिन धा धिन
सा रे ग म
प ध नि सां
सां नि ध प
म ग रे सा
हर विभाग में 4 स्वर रखें।
सम पर “सा” या “सां” अवश्य आए।
4. बोल-आलाप अभ्यास
A# स्केल में बोल-आलाप तीनताल में बहुत प्रभावी होता है।
आ – आ – आ – आ
ना – ना – ना – ना
रे – रे – रे – रे
हर बोल को ताल के साथ बैठाकर गाएँ।
इससे गायकी में लयात्मक सौंदर्य आता है।
5. तान अभ्यास (सरल)
तीनताल में शुरुआत में सरल तानें ही लगाएँ।
उदाहरण:
सा रे ग म | प म ग रे | सा रे ग म | प ध नि सां |
सां नि ध प | म ग रे सा | सा – – – | सा – – – |
तान छोटी रखें, साफ रखें।
गति बढ़ाने से पहले शुद्धता ज़रूरी है।
6. तबला के साथ तालबोध
तीनताल में अभ्यास करते समय—
सम (पहली मात्रा) को पहचानें
हर खंड के अंत को समझें
खाली (9वीं मात्रा) पर सजग रहें
तबले की थाप को सुनते हुए गाने से ताल की गहराई समझ में आती है।
7. रोज़ाना अभ्यास क्रम
A# स्केल में आदर्श अभ्यास क्रम:
5 मिनट – तानपुरा सुनना
10 मिनट – स्वर साधना
10 मिनट – सरगम (तीनताल)
10 मिनट – आलाप / बोल
10 मिनट – तान अभ्यास
👉 कुल: 45 मिनट
अभ्यास के लाभ
A# स्केल में तानपुरा और तीनताल के साथ अभ्यास करने से—
सुर और ताल दोनों मजबूत होते हैं
आवाज़ में गहराई आती है
मंच पर गाने का आत्मविश्वास बढ़ता है
रागदारी की समझ विकसित होती है
गुरु के निर्देश जल्दी समझ में आते हैं
निष्कर्ष
A# स्केल में तानपुरा और तबला (तीनताल) के साथ किया गया अभ्यास एक पूर्ण संगीत साधना है। यह अभ्यास केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुर-लय-भाव का संगम है। नियमित, धैर्यपूर्वक और श्रद्धा से किया गया अभ्यास साधक को निश्चित रूप से आगे बढ़ाता है। तानपुरा का नाद और तबले की ताल जब A# स्केल में स्वर के साथ एक हो जाते हैं, तब संगीत आत्मा को स्पर्श करने लगता है।
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